जयपुर। राजस्थान की न्यायपालिका को देशभर में एक अलग सम्मान की नजर से देखा जाता हैं. वर्ष 2025 ने राजस्थान की न्यायपालिका ने अपने रिपोर्टेबल जजमेंट के जरिए देशभर में एक अलग ही पहचान बनाई हैं.
इस वर्ष हाईकोर्ट द्वारा दिए गए कई फैसलों ने न केवल कानून की व्याख्या को नई दिशा दी, बल्कि आमजन, प्रशासन, न्यायिक व्यवस्था और राष्ट्रीय हित से जुड़े अहम मुद्दों पर दूरगामी प्रभाव छोड़ा।
पार्ट–5 में हम ऐसे ही ऐतिहासिक और महत्वपूर्ण निर्णयों को आपके सामने प्रस्तुत कर रहे हैं, जिनमें न्यायालय ने संवैधानिक मूल्यों, विधि के शासन और जनहित को केंद्र में रखते हुए स्पष्ट और सशक्त संदेश दिया।
1 प्रदेश में डमी स्कूलों (डमी एडमिशन) पर राजस्थान हाई कोर्ट ने सख्त रूख अपनाते हुए रिपोर्टेबल जजमेंट के जरिए इसे शिक्षा प्रणाली पर ‘कलंक’ बताया.
जस्टिस अनुप कुमार ढंड ने अपने फैसले में स्कूलों और कोचिंग सेंटरों की मिलीभगत पर SIT जांच के आदेश दिए हैं और बिना नियमित उपस्थिति के छात्रों को बोर्ड परीक्षाओं से रोकने, शिक्षकों की कमी पर कार्रवाई करने तथा सभी स्कूलों में करियर काउंसलिंग सेंटर खोलने के निर्देश दिए हैं, ताकि छात्रों का मानसिक स्वास्थ्य और नियमित शिक्षा सुनिश्चित हो सके।
2 राजस्थान हाईकोर्ट ने एक महत्वपूर्ण फैसले में कहा है कि यदि सेवानिवृत्त कर्मचारी को समय पर उसकी सेवानिवृत्ति संबंधी लाभ नहीं दिए जाते हैं, तो विभाग को उस पर निर्धारित दर से ब्याज चुकाना होगा.
जस्टिस महेन्द्र कुमार गोयल की एकलपीठ ने यह आदेश आदेश सेवानिवृति कर्मचारी लक्ष्मीनारायण माथुर की ओर से दायर याचिका पर सुनवाई करते हुए दिए हैं.
3 राजस्थान हाईकोर्ट ने एक महत्वपूर्ण आदेश में GST से संबंधित एक याचिका पर सुनवाई करते हुए GST धारा 169 CGST अधिनियम, 2017 के तहत नोटिस की सही सेवा न होने के आधार पर याचिकाकर्ता को राहत प्रदान की है. राजस्थान हाईकोर्ट ने ये स्पष्ट किया हैं कि विभाग द्वारा कोई भी जबरन वसूली की कार्यवाही करने से पूर्व, नोटिस की सेवा CGST अधिनियम की धारा 169 के अनुसार विधिसम्मत ढंग से की जानी चाहिए.
जस्टिस संजीव प्रकाश शर्मा और जस्टिस संजीत पुरोहित कि खंडपीठ ने यह आदेश लक्ष्य ब्रिक्स और अनिल अग्रवाल की ओर से दायर याचिका पर सुनवाई करते हुए दिया हैं.
4 राजस्थान हाईकोर्ट ने लंदन स्थित ग्रेन एंड फीड ट्रेड एसोसिएशन (GAFTA) द्वारा 28 सितम्बर 2021 को पारित किए गए विदेशी आर्बिट्रेशन अवॉर्ड को मान्यता देते हुए उसे अदालत की डिक्री (Decree of Court) घोषित कर दिया है.
राजस्थान हाईकोर्ट के जस्टिस अनुप कुमार ढंड की एकलपीठ ने अपने रिपोर्टेबल जजमेंट में स्प/ट किया है कि यह अवॉर्ड अब पक्षकारों पर बाध्यकारी है और इसे भारत में लागू व निष्पादित किया जा सकता है।
यह आदेश Kingsroad Handelsges M.B.H, AM Heumarkt की दाय याचिका पर दिया गया हैं.
5 राजस्थान हाईकोर्ट ने शैक्षणिक संस्थानों द्वारा फीस वसूलने के लिए छात्रों के दस्तावेज़ों को रोककर हथियार बनाने को बेहद गंभीर मानते हुए इसे असंवैधानिक बताया है।
राजस्थान हाईकोर्ट ने जयपुर नेशनल यूनिवर्सिटी (JNU) इंस्टीट्यूट ऑफ मेडिकल साइंसेज एंड रिसर्च सेंटर की एक छात्रा के मूल दस्तावेज़ वापस नहीं करने के मामले में यूनिवर्सिटी को कड़ी फटकार लगाते हुए तत्काल याचिकाकर्ता छात्रा के मूल दस्तावेज़ लौटाने के आदेश दिए हैं।
6 Rajasthan Highcourt ने 10.65 करोड़ रुपये के इनपुट टैक्स क्रेडिट (ITC) घोटाले के आरोपी व्यापारी निर्मल कुमार शर्मा को बड़ा झटका देते हुए उसके खिलाफ ट्रायल कोर्ट से जारी गिरफ्तारी वारंट के आदेश को उचित ठहराया है।
Rajasthan Highcourt ने अपने फैसले में स्पष्ट किया कि आर्थिक अपराधों में आरोपी को केवल इसलिए राहत नहीं दी जा सकती कि अपराध मजिस्ट्रेट द्वारा ट्रायल किए जा रहे हैं और इस तरह के मामलों में अधिकतम सजा पाँच वर्ष की है।
जस्टिस अनूप कुमार ढंड की एकलपीठ ने ट्रायल कोर्ट के फैसले को बरकरार रखते हुए आरोपी व्यापारी की याचिका को खारिज कर दिया।
7 राजस्थान हाईकोर्ट ने नोटबंदी के दौरान प्रदेश की 7 सहकारी बैंकों पर आरबीआई द्वारा लगाए गए प्रतिबंध को वैध ठहराया है।राजस्थान हाईकोर्ट ने माना नोटबंदी के दौरान सहकारी बैंकों पर आरबीआई का प्रतिबंध वैध, कोर्ट ने कहा कि नोटबंदी जैसे नियामक निर्णयों में अदालतों को अत्यधिक संयम बरतना चाहिए
जस्टिस डॉ. पुष्पेन्द्र सिंह भाटी और जस्टिस अनुरूप सिंघी की खंडपीठ ने दुधू ग्राम सेवा सहकारी समिति लिमिटेड सहित सात सहकारी समितियों की ओर से दायर याचिकाओं पर रिपोर्टेबल जजमेंट पारित किया है.
8 राजस्थान हाईकोर्ट ने व्यभिचार (Adultery) से जुड़े कानून को लेकर एक बार फिर ऐतिहासिक और महत्वपूर्ण फैसला सुनाया है।
हाईकोर्ट ने स्पष्ट किया है कि भारतीय दंड संहिता की धारा 497 को सुप्रीम कोर्ट द्वारा असंवैधानिक घोषित किए जाने के बाद उसके तहत दर्ज न केवल नए, बल्कि पहले से पेंडिंग सभी आपराधिक मामलों का भी कोई कानूनी अस्तित्व नहीं रह जाता। ऐसे मामलों को जारी रखना कानून की प्रक्रिया का दुरुपयोग होगा।
9 राजस्थान हाईकोर्ट ने ‘ऑपरेशन सिंदूर’ (Operation Sindoor) के तहत राजस्थान से लगते भारत-पाकिस्तान अंतरराष्ट्रीय सीमा के समीप श्रीगंगानगर जिले की सादुलशहर तहसील में प्रस्तावित भारतीय वायुसेना के नए एयरबेस को लेकर महत्वपूर्ण फैसला सुनाया.राजस्थान हाईकोर्ट ने इस महत्वाकांक्षी और रणनीतिक रक्षा परियोजना के लिए किए गए भूमि अधिग्रहण को चुनौती देने वाली सभी याचिकाओं को खारिज कर दिया है।
जस्टिस डॉ. नूपुर भाटी की एकलपीठ ने अपने रिपोर्टेबल जजमेंट में स्पष्ट शब्दों में कहा कि यह परियोजना राष्ट्रीय रक्षा और सुरक्षा से सीधे तौर पर जुड़ी हुई है। ऐसे मामलों में व्यक्तिगत हितों की तुलना में जनहित और राष्ट्रीय हित सर्वोपरि होते हैं।
10 Rajasthan HighCourt ने एक महत्वपूर्ण फैसले में स्पष्ट किया है कि किसी भी सरकारी कर्मचारी के खिलाफ बिना चार्जशीट, बिना विभागीय जांच और बिना सुनवाई के दंडात्मक प्रविष्टि दर्ज करना न केवल नियमों के विरुद्ध है, बल्कि प्राकृतिक न्याय के सिद्धांतों का भी उल्लंघन है।
Rajasthan HighCourt जयपुर पीठ में जस्टिस अशोक कुमार जैन की एकलपीठ ने दौसा की महवा नगरपालिका के एक कर्मचारी टीकम सिंह को बड़ी राहत देते हुए उसकी सेवा पुस्तिका में की गई अवैध और मनमानी प्रविष्टियों को निरस्त करते हुए यह आदेश दिया है।