जोधपुर। राजस्थान हाईकोर्ट ने खाप पंचायतो के खिलाफ एक माह में दूसरा बड़ा फैसला देते हुए खाप पंचायतों की मनमानी पर सीधा प्रहार करते हुए स्पष्ट कर दिया है कि “हुक्का-पानी बंद” जैसी सामाजिक सजा देना कानूनन अपराध है।
राजस्थान हाईकोर्ट ने कहा कि किसी भी व्यक्ति को सामाजिक बहिष्कार के जरिए झुकाने की कोशिश न सिर्फ असंवैधानिक है, बल्कि गंभीर दंडनीय कृत्य भी है।
राजस्थान में खाप पंचायतो के ऐसे तुगलकी फरमानों पर नियत्रंण के लिए हाईकोर्ट ने सुप्रीम कोर्ट के फैसले के अनुसार विस्तृत एसओपी जारी करते हुए सरकार और प्रशासन को कई आदेश निर्देश हैं.
साथ ही इस मामले की जांच एडिशनल एसपी स्तर के अधिकारी से कराने और 90 दिन में जांच पूर्ण करने का आदेश दिया हैं.
जस्टिस फरजंद अली की एकलपीठ ने यह महत्वपूर्ण आदेश मोतीराम की ओर से दायर याचिका पर सुनवाई करते हुए दिए हैं.
जमीन विवाद बना वजह, खाप पंचायत ने सुनाया ‘फरमान’
मामला बालोतरा जिले के मोखंडी निवासी याचिकाकर्ता मोतीराम से जुड़ा हैं. गांव के एक जमीन विवाद के चलते गांव के कुछ लोगों ने खुद को खाप पंचायत बताकर उन पर केस वापस लेने और पैतृक जमीन छोड़ने का दबाव बनाया।
जब उन्होंने इनकार किया, तो पंचायत ने खुलेआम “हुक्का-पानी बंद” का फरमान जारी कर दिया।
परिवार को सामाजिक रूप से अलग-थलग कर दिया गया, रिश्ते-नाते तोड़ दिए गए और सार्वजनिक रूप से अपमानित किया गया।
इतना ही नहीं, पीड़ित परिवार को लगातार धमकियां दी गईं और मानसिक रूप से प्रताड़ित किया गया।
पुलिस में शिकायत के बावजूद कार्रवाई नहीं होने पर मामला हाईकोर्ट पहुंचा।
हाईकोर्ट की सख्त टिप्पणी-“कानून से ऊपर कोई नहीं”
कोर्ट ने अपने फैसले में दो टूक कहा कि “किसी भी व्यक्ति या समूह को यह अधिकार नहीं है कि वह सामाजिक दबाव या बहिष्कार के जरिए किसी को मजबूर करे।”
“ऐसी गतिविधियां सीधे-सीधे आपराधिक कृत्य हैं और इन पर सख्ती से रोक लगनी चाहिए।”
कोर्ट ने सुप्रीम कोर्ट के शक्ति वाहिनी केस का हवाला देते हुए प्रशासन को तुरंत कार्रवाई के निर्देश दिए।
90 दिन में जांच पूरी करने का आदेश
हाईकोर्ट ने पुलिस प्रशासन को फटकार लगाते हुए कहा कि ऐसे मामलों में लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी।
हाईकोर्ट ने डीजीपी को आदेश दिया कि मामले की जांच एडिशनल एसपी स्तर के अधिकारी से जांच करवाई जाए.
साथ ही जांच 90 दिन में पूरी करने के आदेश दिए.
हर जिले में नोडल अधिकारी, बनेगा विशेष तंत्र
राजस्थान हाईकोर्ट ने इस मामले में राजस्थान सरकार को विस्तृत दिशा निर्देश जारी करते हुए हर जिले में नोडल अधिकारी नियुक्त करने का आदेश दिया.
साथ ही खाप पंचायतो से जुड़े मामलो की जांच और ऐसे मामलो के लिए विशेष सेल बनाने के आदेश दिए जहां पर पीड़ित सीधे शिकायत कर सकेंगे.
