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SC ने कांग्रेस नेता पवन खेड़ा को अंतरिम राहत देने से किया इनकार, असम में अग्रिम जमानत लेने के निर्देश

Supreme Court Rules Higher Degree Cannot Replace Mandatory Experience in Government Jobs

नई दिल्ली। कांग्रेस नेता Pawan Khera को सुप्रीम कोर्ट से राहत नहीं मिली है।

सुप्रीम कोर्ट ने शुक्रवार को पवन खेड़ा की उस याचिका पर सुनवाई से इनकार कर दिया, जिसमें उन्होंने गिरफ्तारी से अंतरिम संरक्षण (इंटरिम प्रोटेक्शन) की मांग की थी।

सुप्रीम कोर्ट ने साफ तौर पर कहा कि वे संबंधित मामले में असम की सक्षम अदालत का रुख करें और वहीं अग्रिम जमानत (Anticipatory Bail) के लिए आवेदन दें।

यह आदेश सुप्रीम कोर्ट में Justice J.K. Maheshwari और Justice Atul S Chandurkar की पीठ ने दिया.

पीठ ने पवन खेड़ा को किसी भी प्रकार की अंतरिम राहत देने से इनकार करते हुए स्पष्ट कर दिया कि सुप्रीम कोर्ट इस स्तर पर हस्तक्षेप नहीं करेगी।

अंतरिम राहत देने से इनकार

सुनवाई के दौरान पवन खेड़ा की ओर से दलील दी गई कि असम की अदालतें फिलहाल बंद हैं और ऐसी स्थिति में उनकी गिरफ्तारी की आशंका बनी हुई है।

उन्होंने अदालत से आग्रह किया कि कम से कम 21 अप्रैल तक उन्हें गिरफ्तारी से अस्थायी संरक्षण दिया जाए, ताकि वे उचित कानूनी उपाय कर सकें।

हालांकि, सुप्रीम कोर्ट इस दलील से संतुष्ट नहीं हुआ।

पीठ ने कहा कि ऐसे मामलों में स्थानीय अदालतों का रुख करना ही उचित प्रक्रिया है। अदालत ने यह भी संकेत दिया कि केवल संभावित गिरफ्तारी के आधार पर सीधे सुप्रीम कोर्ट से राहत नहीं मांगी जा सकती।

असम कोर्ट जाने के निर्देश

सुप्रीम कोर्ट ने स्पष्ट शब्दों में कहा कि पवन खेड़ा को असम की सक्षम अदालत में जाकर अग्रिम जमानत के लिए आवेदन करना चाहिए।

अदालत ने यह भी कहा कि वह इस मामले में अंतरिम संरक्षण देने के लिए इच्छुक नहीं है।

ये हैं मामला

यह पूरा विवाद 5 अप्रैल को हुई एक प्रेस कॉन्फ्रेंस से जुड़ा है, जिसमें पवन खेड़ा ने असम के मुख्यमंत्री Himanta Biswa Sarma और उनकी पत्नी Riniki Bhuyan Sharma को लेकर गंभीर आरोप लगाए थे।

खेड़ा ने आरोप लगाया था कि मुख्यमंत्री की पत्नी के पास कई पासपोर्ट हैं और उनके पास विदेशों में ऐसी संपत्तियां हैं, जिनका खुलासा चुनावी हलफनामे में नहीं किया गया।

उन्होंने यह भी दावा किया कि ये जानकारियां सार्वजनिक नहीं की गईं, जो गंभीर सवाल खड़े करती हैं।

असम में दर्ज है मामला

पवन खेड़ा के खिलाफ यह मामला असम के गुवाहाटी क्राइम ब्रांच पुलिस स्टेशन में दर्ज किया गया है।

उन पर भारतीय न्याय संहिता (BNS) की विभिन्न धाराओं के तहत केस दर्ज किया गया है, जिनमें चुनाव से जुड़े मामलों में गलत बयान देना, धोखाधड़ी (धारा 318) और अन्य संबंधित प्रावधान शामिल हैं।

इन धाराओं के तहत आरोप गंभीर माने जाते हैं और गिरफ्तारी की संभावना को पूरी तरह नकारा नहीं जा सकता।

आरोपों को बताया गया निराधार

इन आरोपों पर मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा और उनकी पत्नी ने कड़ा विरोध जताया था।

उन्होंने इन सभी आरोपों को पूरी तरह निराधार और मनगढ़ंत बताया। मुख्यमंत्री ने कहा था कि यह राजनीतिक रूप से प्रेरित बयान हैं और उनकी छवि को नुकसान पहुंचाने की कोशिश है।

तेलंगाना हाईकोर्ट के आदेश पर पहले ही रोक

इस मामले में सुप्रीम कोर्ट पहले भी हस्तक्षेप कर चुका है। 15 अप्रैल को शीर्ष अदालत ने Telangana High Court के उस आदेश पर रोक लगा दी थी, जिसमें पवन खेड़ा को एक सप्ताह की ट्रांजिट अग्रिम जमानत दी गई थी।

सुप्रीम कोर्ट के इस फैसले के बाद पवन खेड़ा की कानूनी स्थिति और अधिक जटिल हो गई थी, क्योंकि उन्हें पहले मिली अस्थायी राहत भी समाप्त हो गई।

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