जोधपुर। राजस्थान हाईकोर्ट ने नाथद्वारा मंदिर बोर्ड की भूमि अधिग्रहण से जुड़े मामले में महत्वपूर्ण हस्तक्षेप करते हुए संबंधित पक्षों को यथास्थिति बनाए रखने के निर्देश दिए हैं।
जस्टिस संजीत पुरोहित की एकल पीठ ने मामले की गंभीरता को देखते हुए केंद्र सरकार सहित अन्य पक्षों को नोटिस जारी कर जवाब तलब किया है।
मामला नाथद्वारा मंदिर बोर्ड की लगभग 1.4745 हेक्टेयर भूमि से जुड़ा है, जिसे वर्ष 2018 में जारी अधिग्रहण अधिसूचना के तहत अधिग्रहित करने का प्रस्ताव था।
याचिकाकर्ता बोर्ड की ओर से इस अधिसूचना पर विस्तृत आपत्तियाँ प्रस्तुत की गई थीं। इन आपत्तियों पर विचार करते हुए राजसमंद के जिला कलेक्टर एवं भूमि अधिग्रहण अधिकारी ने 29 जनवरी 2019 को अपने आदेश में बोर्ड की भूमि को अधिग्रहण से बाहर रखने की सिफारिश की थी।
इसके बाद 18 मार्च 2019 को जारी अंतिम अधिसूचना में भी मंदिर बोर्ड की भूमि को अधिग्रहण से बाहर रखा गया। लेकिन बाद में संबंधित प्राधिकरणों द्वारा पुनः कार्रवाई करते हुए राष्ट्रीय राजमार्ग अधिनियम, 1956 की धारा 3ए के तहत नई अधिसूचना जारी कर उक्त भूमि को फिर से अधिग्रहण प्रक्रिया में शामिल कर लिया गया।
याचिकाकर्ता की ओर से इस नई अधिसूचना के खिलाफ भी विस्तृत आपत्तियाँ दर्ज कराई गईं।
आरोप है कि संबंधित अधिकारियों ने इन आपत्तियों पर उचित विचार नहीं किया और न ही अधिनियम की धारा 3सी के तहत सुनवाई का अवसर प्रदान किया। इसके बावजूद अंतिम अधिसूचना जारी कर भूमि को अधिग्रहण में शामिल कर लिया गया, जिसे याचिकाकर्ता ने न्यायालय में चुनौती दी है।
हाईकोर्ट ने प्रथम दृष्टया मामले को विचारणीय मानते हुए केंद्र सरकार को नोटिस जारी किया है, जिसका जवाब छह सप्ताह में प्रस्तुत करने के निर्देश दिए गए हैं। साथ ही, अदालत ने स्पष्ट किया है कि जब तक मामले की सुनवाई जारी है, तब तक संबंधित भूमि के संबंध में कोई भी पक्ष स्थिति में बदलाव नहीं करेगा और यथास्थिति बनाए रखेगा।
सुनवाई के दौरान याचिकाकर्ता की ओर से अधिवक्ता विनीत दवे ने पक्ष रखा, जबकि केंद्र सरकार की ओर से अतिरिक्त महाधिवक्ता सहित अन्य अधिवक्ताओं ने पैरवी की।
अदालत ने निर्देश दिया कि याचिका की प्रति संबंधित सरकारी वकीलों को उपलब्ध कराई जाए ताकि वे प्रभावी ढंग से जवाब प्रस्तुत कर सकें।