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राजस्थान हाईकोर्ट वीकली डाइजेस्ट-सेकेंड वीक 2026 | सरल हिंदी में

Minor Daughter’s Credible Testimony Alone Sufficient for Conviction in Incest Rape Case: Rajasthan High Court

जोधपुर/जयपुर। वर्ष 2026 के दूसरे सप्ताह में राजस्थान हाईकोर्ट ने कई ऐसे महत्वपूर्ण और दूरगामी प्रभाव वाले फैसले सुनाए, जो न केवल कानून के छात्रों और अधिवक्ताओं के लिए बल्कि आम नागरिकों, सरकारी विभागों और नीति-निर्माताओं से लेकर लॉ स्टूडेंट के लिए बेहद आवश्यक हैं.

यह वीकली डाइजेस्ट राजस्थान हाईकोर्ट के उन फैसलो का समग्र संकलन हैं, जिनमें संवैधानिक अधिकारों की रक्षा, प्रशासनिक जवाबदेही, सेवा कानून, आपराधिक न्याय, पर्यावरण संरक्षण और जनहित के मुद्दों पर अदालत का दृष्टिकोण का सामने आता हैं.

इस वीकली डाइजेस्ट में उन प्रमुख फैसलो को को आसान भाषा में एक जगह प्रस्तुत किया जा रहा है।

1 ऐतिहासिक स्थलों के संरक्षण पर आदेश

हाईकोर्ट ने कहा कि ऐतिहासिक स्थल हमारी धरोहर हैं। इन्हें पिकनिक स्पॉट की तरह इस्तेमाल करना गलत है। कोर्ट ने प्रशासन को निर्देश दिए कि अतिक्रमण हटाया जाए, गंदगी रोकी जाए और संरक्षण के लिए ठोस कदम उठाए जाएं।

2 सेवा मामलों में कारण बताना जरूरी

कोर्ट ने साफ कहा कि किसी कर्मचारी को सजा देने या उसके खिलाफ कार्रवाई करने से पहले कारण बताना अनिवार्य है। बिना कारण दिए गया आदेश अवैध माना जाएगा। ऐसे आदेश को “स्पीकिंग ऑर्डर” होना चाहिए, ताकि कर्मचारी समझ सके कि फैसला क्यों लिया गया।

3 डांटना या फटकारना, आत्महत्या के लिए उकसावे का कारण नहीं।

हाईकोर्ट ने स्पष्ट किया कि धारा 306 आईपीसी तभी लागू होगी जब जानबूझकर उकसाया गया हो, लगातार मानसिक यातना दी गई हो और आत्महत्या तथा आरोपी के कृत्य के बीच सीधा और निकट संबंध (proximate cause) हो।

4 “अनुच्छेद 226 के तहत अदालत उदारता दिखाने के लिए बाध्य नहीं है”

“बहुत अधिक देरी न्याय के मार्ग में बाधक है। अनुच्छेद 226 के तहत अदालत आलसी और निष्क्रिय व्यक्तियों के प्रति उदारता दिखाने के लिए बाध्य नहीं है।”

5 जाति प्रमाण पत्र की समयसीमा और प्रारूप अनिवार्य

हाईकोर्ट ने कहा कि भर्ती विज्ञापन की शर्तें सभी अभ्यर्थियों पर समान रूप से लागू होती हैं, पात्रता और आरक्षण का दावा आवेदन की अंतिम तिथि तक उपलब्ध वैध दस्तावेज़ों के आधार पर ही किया जा सकता है-

6 नए तथ्यों पर रिजर्व रखे गए फैसले को किया जा सकता हैं रिलीज

हाईकोर्ट की खंडपीठ ने मामले में पेश किए गए नए तथ्यों और परिस्थितियों को देखते हुए पूर्व में पारित किए गए “जजमेंट रिज़र्व्ड” की श्रेणी से मामले को मुक्त करने का फैसला किया।नए तथ्यों पर रिजर्व रखे गए फैसले को किया जा सकता हैं रिलीज

7 एक बार आवंटित कि गयी भूमि से इनकार नहीं कर सकती सरकार

हाईकोर्ट ने कहा कि सार्वजनिक संस्थाओं को “नीति परिवर्तन” या “प्रशासनिक सुविधा” के नाम पर अपने पूर्व निर्णयों से पलटने की अनुमति नहीं दी जा सकती, विशेषकर तब जब दूसरा पक्ष वर्षों से आर्थिक और कानूनी नुकसान झेल चुका हो।

8 डायरी में दर्ज प्रविष्टियां स्वयं में अघोषित आय नहीं

आयकर अपीलीय न्यायाधिकरण (ITAT) द्वारा पेनल्टी को मेरिट पर रद्द कर दिया जाता है और किसी भी प्रकार की जानबूझकर कर चोरी (willful concealment) सिद्ध नहीं होती, तो उसी आधार पर शुरू की गई आपराधिक कार्यवाही को जारी रखना कानून की प्रक्रिया का दुरुपयोग माना जाएगा।

9 हत्या का ईरादा नहीं होने पर नहीं दी जा सकती हत्या के आरोप में सजा

10 मामूली अपराधों के आधार पर किसी व्यक्ति की आजीविका छीनी नहीं जा सकती

हाईकोर्ट ने कहा कि सभी आपराधिक मामले नाबालिग अवस्था के हैं और दोषसिद्धि वाले अपराध अत्यंत तुच्छ प्रकृति के हैं

11 प्री-प्राइमरी में भी अनिवार्य होगा RTE प्रवेश

राजस्थान हाईकोर्ट ने स्पष्ट किया हैं कि जिन निजी स्कूलों में प्री-प्राइमरी कक्षाएं (PP1, PP2, PP3) संचालित की जा रही हैं, वहां आरटीई के तहत 25 प्रतिशत आरक्षण एंट्री लेवल से ही देना अनिवार्य होगा।

12  शर्त के जरिए पैरोल के अधिकार से वंचित नहीं किया जा सकता

Rajasthan Highcourt ने कहा है कि व्यक्तिगत बांड की राशि कैदी की आर्थिक स्थिति के अनुरूप होनी चाहिए, न कि दमनकारी।

13 दुष्कर्म के मामले में पीड़िता बेटी की गवाही ही काफ़ी

राजस्थान हाईकोर्ट ने एक पिता द्वारा अपनी ही नाबालिग बेटी के साथ किए गए दुष्कर्म के मामले को जघन्य अपराध बताते हुए कहा कि ऐसे मामलों में पीड़िता-बेटी की भरोसेमंद गवाही ही दोष सिद्ध करने के लिए पर्याप्त है, और इसके लिए अतिरिक्त corroboration की अनिवार्यता नहीं है।

14 अनुसूचित घोषित होने मात्र से राज्य के सामान्य कानूनों का स्वतः निषेध नहीं हो जाता।

हाईकोर्ट ने कहा संविधान की पाँचवीं अनुसूची के पैरा 5(1) के तहत राज्यपाल द्वारा कोई विशेष अधिसूचना जारी कर किसी कानून को अपवर्जित या संशोधित नहीं किया जाता, तब तक वह कानून अनुसूचित क्षेत्रों में भी लागू रहेगा।

15 फोटो या मीडिया रिपोर्ट अपने आप में पुख्ता सबूत नहीं

राजस्थान हाईकोर्ट ने स्पष्ट किया है कि बिना नियमित विभागीय जांच के केवल अखबार में प्रकाशित फोटो या अप्रमाणित सामग्री के आधार पर किसी पुलिस अधिकारी को दोषी ठहराकर सजा नहीं दी जा सकती।

16 नहीं छीना जा सकता केवल तकनीकी आधारों पर कल्याणकारी योजनाओं का लाभ

राजस्थान हाईकोर्ट ने कहा कि किसी लाभार्थी के पास समय पर आवश्यक दस्तावेज उपलब्ध न हों और उसने समय-सीमा के भीतर ऑफलाइन आवेदन प्रस्तुत किया हो, तो उसे केवल तकनीकी कारणों से योजना के लाभ से वंचित नहीं किया जा सकता।

17 पिता की अभिरक्षा में बच्चा अवैध हिरासत में नहीं

राजस्थान हाईकोर्ट ने कहा कि बच्चे की कस्टडी से जुड़े विवादों के समाधान के लिए हैबियस कॉर्पस याचिका उचित उपाय नहीं है, बल्कि इसके लिए कानून में उपलब्ध अन्य वैधानिक उपाय अपनाए जाने चाहिए।

18 बिना कारण नीलामी रद्द करना मनमानी

राजस्थान हाईकोर्ट ने स्पष्ट करते हुए कहा कि किसी भी सार्वजनिक प्राधिकरण को मनमाने ढंग से, बिना ठोस और लिखित कारण बताए नीलामी रद्द करने का अधिकार नहीं है। ऐसा करना संविधान के अनुच्छेद 14 और 300-A का उल्लंघन है।

19 सेवा अवधि कम मामलों में दैनिक वेतनभोगी कर्मचारी की पुनर्नियुक्ति नहीं, मुआवज़ा ही उपयुक्त

राजस्थान हाईकोर्ट ने कहा श्रम कानूनों से जुड़े एक महत्वपूर्ण मामले में स्पष्ट किया है कि औद्योगिक विवाद अधिनियम, 1947 की धारा 25F का उल्लंघन पाए जाने मात्र से कर्मचारी की पुनर्नियुक्ति (री-इंस्टेटमेंट) स्वतः अनिवार्य नहीं हो जाती।

20 एक छात्रवृत्ति के आधार पर दो अलग-अलग परिवार अयोग्य नहीं हो सकते

राजस्थान हाईकोर्ट ने स्पष्ट किया है कि विवाह से पहले पत्नी को मिली छात्रवृत्ति के आधार पर पति को छात्रवृत्ति से वंचित नहीं किया जा सकता। क्योंकि विवाह से पहले महिला अपने पिता के परिवार की सदस्य होती है और विवाह के बाद पति के परिवार का हिस्सा बनती है।

21 पुलिस बिना मजिस्ट्रेट आदेश के बैंक खाता फ्रीज नहीं कर सकती

राजस्थान हाईकोर्ट ने आदेश दिया हैं कि केवल संदेह के आधार पर किसी व्यक्ति का पूरा बैंक खाता फ्रीज करना न तो कानूनी है और न ही संविधान सम्मत। राजस्थान हाईकोर्ट ने राजस्थान पुलिस को आदेश दिया हैें कि अब ऐसे मामले में खाता ​फ्रीज करने के लिए मजिस्ट्रेट के आदेश जरूरी हैं.

22 अवैध बर्खास्तगी का लाभ सरकार को नहीं, कर्मचारी को मिलेगा

राजस्थान हाईकोर्ट ने स्पष्ट किया कि जब किसी कर्मचारी की बर्खास्तगी को अदालत द्वारा रद्द कर दिया जाता है, तो उसे कानूनी कल्पना (legal fiction) के तहत उसी तिथि से सेवा में माना जाएगा, जिस तिथि को उसकी सेवा अवैध रूप से समाप्त की गई थी।

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