जोधपुर: राजस्थान हाईकोर्ट ने मेडिकल पैरोल न मिलने के कारण बीकानेर सेंट्रल जेल में महिला कैदी की मौत के मामले को गंभीरता से लेते हुए स्वतः संज्ञान लिया है।
हाईकोर्ट ने कहा कि राजस्थान कैदी पैरोल नियम, 2021 की मौजूदा व्यवस्था के कारण महिला को पैरोल नहीं मिल सकी।
इसी वजह से हाईकोर्ट ने स्वत: संज्ञान लेकर नियम 11(1)(i) समेत संबंधित प्रावधानों की समीक्षा करने का फैसला किया है।
कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश संजीव प्रकाश शर्मा और जस्टिस संजीत पुरोहित की खंडपीठ ने महिला की पैरोल याचिका पर सुनवाई के दौरान यह आदेश दिया।
हाईकोर्ट ने महिला की मौत पर चिंता जताते हुए कहा कि यह संबंधित जिला मजिस्ट्रेट की असंवेदनशीलता का मामला है।
महिला गंभीर बीमारी से पीड़ित थी और उसके बेटे ने इलाज के लिए पैरोल मांगी थी, लेकिन उसे खारिज कर दिया गया। बाद में महिला की जेल में ही मौत हो गई।
महिला की मौत के बाद हाईकोर्ट ने उसकी पैरोल याचिका पर सुनवाई समाप्त कर दी। हालांकि, कोर्ट ने मामले को वहीं खत्म नहीं होने दिया।
हाईकोर्ट ने रजिस्ट्री को स्वत: संज्ञान लेकर अलग याचिका दर्ज करने का निर्देश दिया, ताकि राजस्थान प्रिजनर्स रिलीज ऑन पैरोल रूल्स, 2021 के प्रावधानों, खासकर नियम 11(1)(i), की समीक्षा की जा सके।
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जिला मजिस्ट्रेट ने आवेदन खारिज किया
यह मामला बीकानेर सेंट्रल जेल में बंद 57 वर्षीय मंजू देवी से जुड़ा है। जो गंभीर बीमारियों से पीड़ित थी।
उसे दिल की बीमारी, फेफड़ों से जुड़ी समस्या और अन्य गंभीर स्वास्थ्य दिक्कतें थीं। उसकी हालत लगातार बिगड़ रही थी और इलाज के लिए पैरोल की मांग की गई थी।
महिला के बेटे ने उसकी ओर से पैरोल के लिए आवेदन किया, ताकि जेल से बाहर बेहतर इलाज कराया जा सके।
लेकिन संबंधित जिला मजिस्ट्रेट ने यह आवेदन खारिज कर दिया। इसके बाद इस फैसले को चुनौती देते हुए मामला राजस्थान हाईकोर्ट पहुंचा।
याचिका में कहा गया कि महिला की हालत लगातार बिगड़ रही है और जेल से बाहर इलाज की जरूरत है।
सुनवाई के दौरान महिला की मौत
मामले की सुनवाई चल ही रही थी कि महिला की जेल में बीमारी के कारण मौत हो गई।
इसके बाद हाईकोर्ट ने कहा कि अब पैरोल याचिका पर फैसला देने का सवाल नहीं रह जाता, इसलिए वह याचिका समाप्त की जाती है।
हालांकि कोर्ट ने साफ किया कि इस मामले ने पैरोल नियमों से जुड़ा एक बड़ा सवाल खड़ा कर दिया है, जिसे नजरअंदाज नहीं किया जा सकता।
डीएम पर कोर्ट की सख्त टिप्पणी
हाईकोर्ट ने अपने आदेश में कहा कि यह संबंधित जिला मजिस्ट्रेट की असंवेदनशीलता का एक स्पष्ट उदाहरण है।
हाईकोर्ट ने कहा कि महिला गंभीर स्वास्थ्य समस्याओं से जूझ रही थी और उसके बेटे ने केवल इतना अनुरोध किया था कि उसे पैरोल मिल जाए, ताकि उसका बेहतर इलाज कराया जा सके।
इसके बावजूद आवेदन खारिज कर दिया गया और महिला को पैरोल नहीं मिल सकी।
हाईकोर्ट ने माना कि इसी फैसले के कारण महिला को इलाज का मौका नहीं मिल सका और बीमारी के चलते उसकी मौत हो गई।
पैरोल नियमों पर उठे सवाल
सुनवाई के दौरान हाईकोर्ट ने राजस्थान कैदी पैरोल नियम, 2021 के नियम 11(1)(i) पर भी सवाल उठाया।
हाईकोर्ट ने कहा कि इस नियम के तहत किसी कैदी को उसके करीबी रिश्तेदार की गंभीर बीमारी पर पैरोल दी जा सकती है, लेकिन यदि खुद कैदी गंभीर बीमारी से पीड़ित हो, तो उसके लिए ऐसा स्पष्ट प्रावधान नहीं है।
हाईकोर्ट ने कहा कि राजस्थान कैदी पैरोल नियम, 2021 की व्याख्या के कारण महिला को पैरोल नहीं मिल सकी। इसलिए कोर्ट ने नियम 11(1)(i) समेत संबंधित प्रावधानों की जांच के लिए स्वत: संज्ञान लिया।
खुद उठाया मामला
महिला की मौत के बाद भी हाईकोर्ट ने मामले को बंद नहीं किया।
हाईकोर्ट ने रजिस्ट्री को निर्देश दिया कि इस पूरे घटनाक्रम पर स्वत: संज्ञान लेकर अलग याचिका दर्ज की जाए।
इस याचिका में राजस्थान कैदी पैरोल नियम, 2021 के प्रावधानों की समीक्षा की जाएगी और यह देखा जाएगा कि क्या गंभीर बीमारी से जूझ रहे कैदियों के लिए नियमों में बदलाव की जरूरत है।
हाईकोर्ट ने अधिवक्ता शांभवी मार्डिया को इस मामले में एमिकस क्यूरी नियुक्त किया है। उन्हें कोर्ट की सहायता करने और नियमों से जुड़े कानूनी पहलुओं पर अपना पक्ष रखने की जिम्मेदारी दी गई है।
19 अगस्त को अगली सुनवाई
हाईकोर्ट ने स्वत: संज्ञान वाली याचिका को 19 अगस्त 2026 को सुनवाई के लिए सूचीबद्ध किया है।
अब इस सुनवाई में कोर्ट यह विचार करेगी कि राजस्थान कैदी पैरोल नियम, 2021 के मौजूदा प्रावधान गंभीर रूप से बीमार कैदियों के अधिकारों की पर्याप्त सुरक्षा करते हैं या नहीं।
हाईकोर्ट ने यह भी तय किया है कि इस मामले में विस्तृत सुनवाई होगी और जरूरत पड़ने पर नियमों में बदलाव या नई दिशा-निर्देश भी दिए जा सकते हैं।