नई दिल्ली: सुप्रीम कोर्ट ने दिल्ली के ए.एन. झा डियर पार्क (हौज खास) से हिरणों को राजस्थान के टाइगर रिजर्व में शिफ्ट करने के फैसले को मंजूरी दे दी है।
जस्टिस विक्रम नाथ और जस्टिस संदीप मेहता की बेंच ने दिल्ली हाईकोर्ट के फैसले को बरकरार रखते हुए स्पष्ट किया कि हिरणों का ट्रांसलोकेशन वैज्ञानिक, कानूनी और पर्यावरणीय रूप से सही है।
कोर्ट ने इस मामले को निपटाते हुए केंद्र सरकार को देशभर में वन्यजीवों के ट्रांसलोकेशन के लिए व्यापक गाइडलाइंस बनाने का निर्देश भी दिया।
CEC रिपोर्ट पर आदेश, ‘तय सीमा से ज्यादा नहीं रहेंगे हिरण’
कोर्ट ने सेंट्रल एम्पावर्ड कमेटी (CEC) की रिपोर्ट को पूरी तरह स्वीकार कर लिया। रिपोर्ट में बताया गया कि ए.एन. झा पार्क की क्षमता सिर्फ 38 हिरणों को रखने की है। इसके अनुसार, सीमित संख्या में ही हिरण पार्क में रह सकते हैं, जबकि बाकी को चरणबद्ध तरीके से राजस्थान के मुकुंदरा हिल्स टाइगर रिजर्व और रामगढ़ विषधारी टाइगर रिजर्व में भेजा जाएगा।
कोर्ट ने यह भी कहा कि पार्क में हिरणों को रखने के लिए सेंट्रल जू अथॉरिटी की अनुमति जरूरी होगी। साथ ही दिल्ली डेवलपमेंट अथॉरिटी (DDA) को जरूरी इंफ्रास्ट्रक्चर, संसाधन और प्रशिक्षित स्टाफ सुनिश्चित करना होगा।
वैज्ञानिक तरीके से होगा ट्रांसलोकेशन
सुप्रीम कोर्ट ने निर्देश दिया कि हिरणों का ट्रांसलोकेशन पूरी तरह वैज्ञानिक तरीके से और तय समय सीमा के भीतर किया जाए। इसमें जानवरों की पहचान, टैगिंग, ट्रांसपोर्ट, मेडिकल जांच और बाद की निगरानी (पोस्ट-रिलीज मॉनिटरिंग) शामिल होगी।
कोर्ट ने कहा कि यह प्रक्रिया अंतरराष्ट्रीय मानकों, खासकर IUCN गाइडलाइंस के अनुरूप होनी चाहिए। इस पूरे काम की निगरानी सेंट्रल एम्पावर्ड कमेटी करेगी।
कोर्ट ने यह भी साफ कर दिया कि ए.एन. झा डियर पार्क का स्टेटस ‘प्रोटेक्टेड फॉरेस्ट’ ही रहेगा और इसमें किसी भी तरह का बदलाव नहीं किया जा सकता। इसका मतलब है कि इस क्षेत्र का उपयोग भविष्य में भी केवल वन्यजीव संरक्षण के लिए ही किया जाएगा।
देशभर के लिए बनेंगी नई गाइडलाइंस
इस फैसले का सबसे बड़ा असर राष्ट्रीय स्तर पर देखने को मिलेगा। सुप्रीम कोर्ट ने पर्यावरण, वन और जलवायु परिवर्तन मंत्रालय को निर्देश दिया कि वह CEC द्वारा तैयार ड्राफ्ट गाइडलाइंस की समीक्षा करें और उन्हें 6 महीने के भीतर लागू करें।
इन गाइडलाइंस में वन्यजीवों के ट्रांसलोकेशन से जुड़े सभी पहलुओं को शामिल किया गया है, जैसे:
- वैज्ञानिक मूल्यांकन।
- जानवरों की पहचान और ट्रैकिंग।
- सुरक्षित परिवहन।
- पशु चिकित्सा देखभाल।
- नए स्थान की पारिस्थितिक उपयुक्तता।
- रिलीज के बाद निगरानी।
कोर्ट ने कहा कि इन गाइडलाइंस को कानूनी दर्जा दिया जाना चाहिए और इसके पालन की रिपोर्ट कोर्ट में पेश की जाएगी।
क्या था पूरा मामला?
यह मामला तब शुरू हुआ जब ए.एन. झा डियर पार्क से सैकड़ों हिरणों को राजस्थान भेजने के प्रस्ताव को चुनौती दी गई। याचिकाकर्ता, एक पर्यावरण संस्था, ने इस फैसले का विरोध करते हुए कहा कि हिरणों को पार्क के अंदर ही ज्यादा जगह देकर रखा जाना चाहिए।
वहीं, सरकारी एजेंसियों ने दलील दी कि पार्क की क्षमता सीमित है और बढ़ती हिरणों की संख्या से पर्यावरण संतुलन बिगड़ सकता है। साथ ही शिकार (poaching) का खतरा भी बढ़ रहा था, जिससे ट्रांसलोकेशन जरूरी हो गया।
दिल्ली हाईकोर्ट ने पहले इस मामले को निपटाते हुए DDA के आश्वासन पर भरोसा जताया था। लेकिन बाद में सुप्रीम कोर्ट ने 26 नवंबर 2025 को ट्रांसलोकेशन पर रोक लगा दी थी।
कोर्ट ने DDA की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाते हुए ‘लापरवाही का चिंताजनक पैटर्न’ बताया था और पूरे मामले की जांच के आदेश दिए थे। साथ ही CEC से रिपोर्ट मांगी गई थी।
अंतिम आदेश: ट्रांसलोकेशन सही, याचिका खत्म
CEC की रिपोर्ट में सामने आया कि पार्क ने ‘मिनी जू’ का दर्जा खो दिया है और यहां तय मानकों का पालन नहीं हो रहा था। हिरणों की संख्या भी नियंत्रण से बाहर हो चुकी थी, जिससे उनका वहीं रहना व्यावहारिक नहीं था।
रिपोर्ट में यह भी कहा गया कि राजस्थान के टाइगर रिजर्व में हिरणों को भेजने से वहां के बाघों के लिए शिकार (prey base) मजबूत होगा, जो पारिस्थितिकी के लिहाज से फायदेमंद है।
सुप्रीम कोर्ट ने सभी तथ्यों को देखते हुए माना कि हिरणों का ट्रांसलोकेशन पूरी तरह उचित है। कोर्ट ने याचिका को खारिज करते हुए मामले को बंद कर दिया और निर्देश दिया कि सभी आदेशों का पालन सुनिश्चित किया जाए।
साथ ही कोर्ट ने कहा कि इस प्रक्रिया की निगरानी के लिए 19 जनवरी 2027 तक अनुपालन रिपोर्ट दाखिल की जाए।
आदेश का असर
यह फैसला सिर्फ दिल्ली या राजस्थान तक सीमित नहीं है, बल्कि पूरे देश में वन्यजीव संरक्षण और प्रबंधन के लिए एक मिसाल बन सकता है। सुप्रीम कोर्ट ने साफ कर दिया है कि पर्यावरणीय फैसले भावनाओं से नहीं, बल्कि वैज्ञानिक तथ्यों और संतुलन के आधार पर लिए जाने चाहिए।
