जयपुर: राजस्थान शिक्षा विभाग में स्कूल लेक्चररों (व्याख्याताओं) की वरिष्ठता को लेकर लंबे समय से चल रहा विवाद अब खत्म हो गया है।
सुप्रीम कोर्ट ने राजस्थान हाईकोर्ट की डिवीजन बेंच के 8 जुलाई 2026 के फैसले को बरकरार रखते हुए वरिष्ठता से जुड़ी याचिकाएं खारिज कर दी हैं।
इस फैसले के बाद अब वाइस प्रिंसिपल और प्रिंसिपल पद पर प्रमोशन के लिए कॉमन वरिष्ठता सूची तैयार करने का रास्ता साफ हो गया है।
यानी एक ही भर्ती प्रक्रिया में चयनित स्कूल लेक्चररों की वरिष्ठता केवल उनकी अलग-अलग नियुक्ति या जॉइनिंग तारीख के आधार पर तय नहीं होगी।
सुप्रीम कोर्ट के फैसले का सीधा असर प्रमोशन की आगे की प्रक्रिया पर पड़ेगा।
राजस्थान सरकार को हाईकोर्ट के निर्देश के मुताबिक कॉमन वरिष्ठता सूची तैयार करनी होगी।
इसके बाद पात्र शिक्षकों की डीपीसी और काउंसलिंग की प्रक्रिया आगे बढ़ सकेगी।
हाईकोर्ट का फैसला बरकरार
वरिष्ठता से जुड़े इस मामले पर सुनवाई जस्टिस के.वी. विश्वनाथन और जस्टिस अरुण पल्ला की खंडपीठ ने की।
सुप्रीम कोर्ट ने राजस्थान हाईकोर्ट की डिवीजन बेंच के 8 जुलाई के फैसले में दखल देने से इनकार कर दिया और उसके खिलाफ दायर याचिकाएं खारिज कर दीं।
याचिकाकर्ताओं की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता कपिल सिब्बल ने वरिष्ठता को लेकर अपनी दलील रखी।
उनका सवाल था कि जो कर्मचारी बाद में सेवा में आया, उसे पहले से वरिष्ठ कैसे माना जा सकता है।
सुप्रीम कोर्ट ने हाईकोर्ट के फैसले में कोई ऐसी कानूनी गलती नहीं मानी, जिसके आधार पर उसमें बदलाव किया जाए।
इसके साथ ही हाईकोर्ट का फैसला बरकरार रहा।
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किस बात को लेकर था विवाद?
मामला स्कूल लेक्चररों की वरिष्ठता तय करने से जुड़ा था।
विवाद इस बात पर था कि एक ही भर्ती विज्ञापन के तहत चयनित शिक्षकों की वरिष्ठता उनकी वास्तविक नियुक्ति या जॉइनिंग की तारीख से तय की जाए या सभी को एक ही तारीख से वरिष्ठता दी जाए।
दरअसल, एक ही भर्ती प्रक्रिया में चयनित कुछ शिक्षकों की नियुक्ति अलग-अलग तारीखों पर हुई थी।
प्रशासनिक कारणों से किसी ने पहले तो किसी ने बाद में जॉइन किया।
इसी वजह से यह सवाल खड़ा हुआ कि वरिष्ठता भी उसी हिसाब से अलग-अलग मानी जाए या भर्ती के लिए तय एक सामान्य तारीख से।
इसी सवाल को लेकर मामला हाईकोर्ट और फिर सुप्रीम कोर्ट तक पहुंचा।
एक भर्ती, एक वरिष्ठता का आधार
राजस्थान हाईकोर्ट ने अपने 8 जुलाई के फैसले में वरिष्ठता को लेकर अहम व्यवस्था दी थी।
हाईकोर्ट ने माना था कि अगर किसी भर्ती विज्ञापन के तहत चयनित एक भी अभ्यर्थी ने सेवा जॉइन कर ली है, तो उसी भर्ती विज्ञापन के तहत चयनित सभी अभ्यर्थियों को उसी तारीख से जॉइन माना जाएगा।
यानी प्रशासनिक कारणों से किसी शिक्षक की वास्तविक नियुक्ति या जॉइनिंग बाद में हुई है तो सिर्फ इस वजह से उसकी वरिष्ठता अलग नहीं होगी।
एक ही भर्ती के तहत चयनित सभी शिक्षकों के लिए वरिष्ठता का आधार एक ही रहेगा।
सुप्रीम कोर्ट ने अब हाईकोर्ट की इस व्यवस्था को बरकरार रखा है।
इससे अलग-अलग तारीखों पर नियुक्ति और जॉइनिंग की वजह से पैदा हुआ वरिष्ठता विवाद खत्म हो गया है।
अब कॉमन वरिष्ठता सूची बनेगी
सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बाद अब शिक्षा विभाग को संबंधित भर्ती के तहत चयनित स्कूल लेक्चररों की कॉमन वरिष्ठता सूची तैयार करनी होगी।
इसमें हाईकोर्ट के 8 जुलाई के फैसले के मुताबिक सभी पात्र शिक्षकों की वरिष्ठता तय की जाएगी।
इसके बाद इसी कॉमन वरिष्ठता सूची के आधार पर वाइस प्रिंसिपल और प्रिंसिपल पदों पर प्रमोशन की प्रक्रिया आगे बढ़ेगी।
पात्र शिक्षकों की डीपीसी और काउंसलिंग भी इसी सूची के आधार पर होगी।
यानी वरिष्ठता को लेकर चल रहा विवाद खत्म होने के बाद अब प्रमोशन के लिए अटकी प्रक्रिया आगे बढ़ने का रास्ता साफ हो गया है।
हजारों व्याख्याताओं के प्रमोशन का रास्ता साफ
इस फैसले का असर राजस्थान के बड़ी संख्या में स्कूल लेक्चररों की प्रमोशन प्रक्रिया पर पड़ने की उम्मीद है।
वरिष्ठता का विवाद खत्म होने के बाद विभाग अब कॉमन वरिष्ठता सूची तैयार कर सकेगा।
इसके बाद पात्र शिक्षकों की डीपीसी और काउंसलिंग की प्रक्रिया पूरी की जाएगी।
प्रमोशन की प्रक्रिया में शामिल शिक्षकों के लिए अब सबसे अहम कदम विभाग की ओर से नई वरिष्ठता सूची जारी करना होगा।
इस तरह सुप्रीम कोर्ट के फैसले ने स्कूल लेक्चररों की वरिष्ठता को लेकर चल रहे पुराने विवाद पर फिलहाल विराम लगा दिया है और वाइस प्रिंसिपल और प्रिंसिपल पदों पर प्रमोशन की आगे की प्रक्रिया का रास्ता साफ कर दिया है।