जयपुर। राजस्थान हाईकोर्ट ने लेबर सेस को लेकर बड़ा फैसला सुनाते हुए सैनी मल्टीस्पेशलिटी अस्पताल को राहत देने से इनकार कर दिया है।
हाईकोर्ट ने उदयपुरवाटी के सैनी मल्टीस्पेशलिटी हॉस्पिटल की ओर से नगर पालिका में जमा किए गए 45 हजार रुपए को लेबर सेस की पूरी देनदारी से एडजस्ट करने की मांग स्वीकार नहीं की और रिकवरी कार्रवाई में दखल देने से इनकार कर दिया।
दरअसल अस्पताल ने लेबर सेस के ₹45 हजार नगर पालिका मंडल में जमा किए थे, लेकिन बाद में उससे सेस, इंटरेस्ट और पेनाल्टी मिलाकर करीब ₹3.42 लाख से ज्यादा की रिकवरी मांगी गई।
मामला इस बात पर पहुंचा कि क्या नगर पालिका में जमा किए गए ₹45 हजार को लेबर सेस की पेमेंट मानकर अस्पताल की देनदारी में एडजस्ट किया जा सकता है।
अस्पताल ने इसी आधार पर अथॉरिटी की रिकवरी कार्रवाई को चुनौती दी थी।
जस्टिस अरुण मोंगा और जस्टिस आशुतोष कुमार की डिवीजन बेंच ने अस्पताल की उस याचिका को खारिज कर दिया, जिसमें नगर पालिका में जमा किए गए ₹45 हजार को लेबर सेस की रकम में एडजस्ट करने और उसी आधार पर इंटरेस्ट-पेनाल्टी समेत रिकवरी पर सवाल उठाया गया था।
हाईकोर्ट ने कहा कि लेबर सेस की रकम कानून के तहत तय अथॉरिटी के पास जमा होना जरूरी है।
नगर पालिका में रकम जमा करने से अस्पताल की वैधानिक जिम्मेदारी खत्म नहीं मानी जा सकती, क्योंकि यह रकम तय अथॉरिटी तक नहीं पहुंची थी।
हालांकि हाईकोर्ट ने अस्पताल को असेसमेंट ऑर्डर के खिलाफ अपील करने की छूट दी है।
कोर्ट ने कहा कि ₹45 हजार के एडजस्टमेंट, इंटरेस्ट और पेनाल्टी की गणना से जुड़े सवाल अपीलीय अथॉरिटी के सामने उठाए जा सकते हैं।
अस्पताल ने नगर पालिका में जमा किए थे पैसे
मामला उदयपुरवाटी के सैनी मल्टीस्पेशलिटी अस्पताल की बिल्डिंग के निर्माण से जुड़ा है।
अस्पताल ने निर्माण के दौरान सितंबर 2019 में 45 हजार रुपए लेबर सेस के तौर पर नगर पालिका मंडल, उदयपुरवाटी में जमा किए थे।
इसके बाद अस्पताल ने 67,724 रुपए की और रकम भी लेबर सेस के रूप में जमा की। ऐसे में पहले जमा किए गए 45 हजार रुपए को भी उसकी कुल देनदारी में शामिल किया जाना चाहिए था।
इसके बाद लेबर सेस असेसिंग अथॉरिटी ने अस्पताल की देनदारी तय कर रिकवरी की कार्रवाई शुरू कर दी।
अथॉरिटी की ओर से अस्पताल से सेस, इंटरेस्ट और पेनाल्टी मिलाकर कुल 3,42,680 रुपए की वसूली मांगी गई।
अस्पताल को कुल ₹3,42,680 की रिकवरी का नोटिस दिया गया था।
यहीं से विवाद शुरू हुआ। अस्पताल ने लेबर सेस की रिकवरी की इस कार्रवाई को राजस्थान हाईकोर्ट में चुनौती दी।
अस्पताल की ओर से कहा गया कि उसने 2019 में ही ₹45 हजार जमा कर दिए थे। इसके बाद उसने ₹67,724 की रकम भी जमा की।
अस्पताल का कहना था कि 2019 में जमा किए गए ₹45 हजार को भी उसकी कुल पेमेंट में शामिल किया जाना चाहिए।
अस्पताल ने इसी आधार पर इंटरेस्ट और पेनाल्टी की गणना पर भी सवाल उठाया।
उसकी दलील थी कि जब रकम पहले ही जमा की जा चुकी थी तो उसे पूरी तरह नजरअंदाज करके पूरी देनदारी और उस पर इंटरेस्ट-पेनाल्टी तय करना सही नहीं है।
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नगर पालिका में जमा रकम पर सरकार की आपत्ति
राज्य सरकार ने ओर से अस्पताल की इस दलील का विरोध किया गया।
सरकार की ओर से कहा गया कि 45 हजार रुपए नगर पालिका मंडल में जमा किए गए थे, जबकि बिल्डिंग एंड अदर कंस्ट्रक्शन वर्कर्स वेलफेयर सेस एक्ट, 1996 के तहत लेबर सेस तय अथॉरिटी के पास जमा करना जरूरी है।
सरकार के मुताबिक नगर पालिका मंडल इस कानून के तहत लेबर सेस लेने वाली संबंधित अथॉरिटी नहीं थी।
इसलिए नगर पालिका में पैसा जमा करने के बावजूद अस्पताल की लेबर सेस की जिम्मेदारी खत्म नहीं हुई।
पेमेंट तय अथॉरिटी तक पहुंचना जरूरी
मामले की सुनवाई के दौरान हाईकोर्ट ने बिल्डिंग एंड अदर कंस्ट्रक्शन वर्कर्स वेलफेयर सेस एक्ट, 1996 और इसके तहत बने नियमों की व्यवस्था को देखा।
हाईकोर्ट ने कहा कि लेबर सेस जमा करने के लिए कानून में तय प्रक्रिया है। रकम उसी अथॉरिटी के पास जमा करनी होती है, जिसे इसकी जिम्मेदारी दी गई है।
हाईकोर्ट ने कहा कि नगर पालिका मंडल इस व्यवस्था का हिस्सा नहीं है। इसलिए सिर्फ किसी सरकारी संस्था में पैसा जमा कर देने से उसे लेबर सेस की पेमेंट नहीं माना जा सकता। रकम तय अथॉरिटी तक पहुंचना जरूरी है।
गलत जगह जमा पैसे से नहीं खत्म होगी देनदारी
हाईकोर्ट ने साफ किया कि लेबर सेस की रकम सिर्फ जमा कर देना काफी नहीं है। रकम कानून के तहत तय अथॉरिटी के पास जमा होना जरूरी है।
हाईकोर्ट ने कहा कि नगर पालिका में जमा की गई 45 हजार रुपए की रकम तय समय में संबंधित अथॉरिटी तक नहीं पहुंची थी।
इसलिए अस्पताल यह नहीं कह सकता कि 45 हजार रुपए जमा करने के साथ उसकी लेबर सेस की पूरी जिम्मेदारी खत्म हो गई।
गलती से रकम किसी दूसरी अथॉरिटी के पास जमा हो गई हो, तब भी इससे लेबर सेस की जिम्मेदारी खत्म नहीं होती।
अपीलीय अथॉरिटी करेगी एडजस्टमेंट का फैसला
हालांकि हाईकोर्ट ने 45 हजार रुपए की रकम को लेबर सेस की पेमेंट नहीं माना, लेकिन अस्पताल के लिए इस रकम को लेकर आगे रास्ता खुला रखा है।
अस्पताल इस रकम के एडजस्टमेंट का सवाल अपीलीय अथॉरिटी के सामने उठा सकता है।
इसके साथ ही वह यह भी बता सकता है कि 2019 में रकम कब जमा की गई थी और बाद में कितनी पेमेंट की गई।
यानी 45 हजार रुपए को लेबर सेस में एडजस्ट किया जाएगा या नहीं, इस पर अंतिम फैसला अपील में हो सकता है।
इंटरेस्ट और पेनाल्टी पर भी अपील में फैसला
मामला सिर्फ 45 हजार रुपए के एडजस्टमेंट तक सीमित नहीं है। अस्पताल ने इंटरेस्ट और पेनाल्टी की गणना पर भी सवाल उठाया था।
हाईकोर्ट ने कहा कि इंटरेस्ट और पेनाल्टी किस तारीख से और किस आधार पर लगाई जानी है, इसका फैसला रिकॉर्ड और उपलब्ध सबूतों के आधार पर किया जा सकता है।
हाईकोर्ट ने बताया कि बिल्डिंग एंड अदर कंस्ट्रक्शन वर्कर्स वेलफेयर सेस एक्ट, 1996 की धारा 11 में असेसमेंट ऑर्डर के खिलाफ अपील का प्रावधान है।
इसलिए अस्पताल इन सभी सवालों को अपीलीय अथॉरिटी के सामने उठा सकता है।
रकम वापस मांग सकता है अस्पताल
हाईकोर्ट ने यह भी माना कि अस्पताल ने 2019 में 45 हजार रुपए नगर पालिका मंडल में जमा किए थे।
अगर यह रकम अभी भी नगर पालिका मंडल के पास है तो अस्पताल उसे वापस लेने की मांग कर सकता है।
सुनवाई के दौरान यह भी सामने आया कि अस्पताल ने बाद में इस रकम को लेबर वेलफेयर ऑफिसर तक पहुंचाने के लिए कदम उठाए थे।
ऐसे में गलत जगह जमा की गई रकम को वापस लेने का रास्ता अस्पताल के लिए खुला रहेगा।
अस्पताल को अपील करने की छूट
राजस्थान हाईकोर्ट ने अस्पताल की रिकवरी कार्रवाई रद्द करने की मांग स्वीकार नहीं की और इसमें सीधे दखल देने से इनकार कर दिया।
हाईकोर्ट ने कहा कि लेबर सेस की रकम तय अथॉरिटी के पास जमा होना जरूरी है। नगर पालिका में जमा किए गए 45 हजार रुपए के आधार पर अस्पताल को रिकवरी से राहत नहीं दी जा सकती।
हालांकि हाईकोर्ट ने अस्पताल को असेसमेंट ऑर्डर के खिलाफ धारा 11 के तहत अपील करने की छूट दी है।
अस्पताल अपील में 45 हजार रुपए के एडजस्टमेंट के साथ इंटरेस्ट और पेनाल्टी की गणना का सवाल भी उठा सकता है।
अगर 45 हजार रुपए की रकम अभी भी नगर पालिका के पास है तो अस्पताल उसे वापस लेने की मांग भी कर सकता है।
यानी रिकवरी कार्रवाई पर हाईकोर्ट से राहत नहीं मिली, लेकिन रकम के एडजस्टमेंट और इंटरेस्ट-पेनाल्टी से जुड़े सवाल अपीलीय अथॉरिटी के सामने उठाने का रास्ता खुला है।