जयपुर। वर्ष 2025 न्यायिक दृष्टि से राजस्थान हाईकोर्ट के लिए कई ऐतिहासिक और दूरगामी फैसलों का साक्षी रहा हैं.
इन फैसलों ने न केवल कानून की व्याख्या को नई दिशा मिली हैं, बल्कि मानवीय अधिकारों, नागरिक अधिकारों, संवैधानिक मूल्यों और न्यायिक प्रक्रिया को भी मजबूती मिली हैं.
lawsandlegals.com अपने पाठकों के लिए एक विशेष श्रृंखला की शुरुआत कर रहा है, जिसमें अगले 11 दिनों तक हम आपको प्रतिदिन वर्ष 2025 में राजस्थान हाईकोर्ट द्वारा दिए गए ऐतिहासिक फैसलों से रूबरू कराएंगे.
इस श्रृंखला के अंतर्गत प्रत्येक फैसले की विस्तृत कानूनी रिपोर्ट, उसके महत्वपूर्ण निष्कर्ष, और साथ ही संबंधित रिपोर्टेबल जजमेंट की डिजिटल कॉपी भी संलग्न की जा रही हैं, ताकि पाठक आसानी से उन जजमेंट को डाउनलोड कर अध्ययन कर सकें।
इस विशेष सीरीज़ की पहली कड़ी के रूप में प्रस्तुत है— वर्ष 2025 में राजस्थान हाईकोर्ट के ऐतिहासिक फैसले | पार्ट–1, जो आपको न्यायिक इतिहास के उन महत्वपूर्ण क्षणों से जोड़ती है, जिन्होंने कानून की दिशा और दशा तय की।
पॉक्सो, रेप, जीवन सुरक्षा से जुड़े कुछ विशेष मामलों में फैसलो को नही जोड़ा गया हैं, लेकिन आपके व्यक्तिगत अनुरोध पर केवल कानूनी जानकारी के लिए साझा किए जा सकते हैं.
वर्ष 2025 के ऐतिहासिक फैसले | पार्ट–1,
1 राजस्थान हाईकोर्ट की जोधपुर पीठ ने एक अहम आदेश पारित करते हुए स्पष्ट कर दिया है कि बैंक द्वारा नीलामी की सार्वजनिक सूचना या विज्ञापन (सेल नोटिस) प्रकाशित करने के साथ ही कर्जदार का ‘राइट ऑफ रिडेम्पशन’ पूरी तरह समाप्त हो जाता है।
जस्टिस डॉ. नुपूर भाटी की एकल पीठ ने यह व्यवस्था कैनरा बैंक के पूर्व कर्मचारी लकी गर्ग की रिट याचिका खारिज करते हुए दी है।
Justice Nupur Bhati, Lucky Garg Versus Canara Bank, 01/12/2025
2 जस्टिस मुनुरी लक्ष्मण की एकलपीठ ने स्पष्ट किया है कि सेवानिवृत्ति के निकट आते समय अपनी जन्मतिथि में बदलाव या संशोधन करवाना न तो उचित है और न ही कानून के अनुसार विधि-सम्मत।
एकलपीठ ने याचिकाकर्ता वाहन चालक लच्छीराम की रिट याचिका को खारिज करते हुए कहा कि नियुक्ति के समय पेश किए गए दस्तावेज ही सेवानिवृत्ति के लिए भी सत्य माने जाएंगे, न कि सेवानिवृत्ति से पूर्व अचानक प्रस्तुत किया गया नया प्रमाणपत्र।
JUSTICE MUNNURI LAXMAN, Lachhi Ram Versus State Of Rajasthan, 26/11/2025
3 राजस्थान हाईकोर्ट ने एक महत्वपूर्ण फैसले में यह स्पष्ट कर दिया है कि राज्यों में अतिरिक्त महाधिवक्ता (AAG) और सरकारी अधिवक्ताओं (Government Counsels) के पद ‘पब्लिक ऑफिस’ की श्रेणी में नहीं आते, और न ही इन्हें संविधान के अनुच्छेद 165 के तहत परिभाषित महाधिवक्ता (Advocate General) के समकक्ष माना जा सकता है।
हाईकोर्ट ने कहा कि इन पदों पर नियुक्ति सरकार की पसंद और विश्वास का विषय लेकिन यह स्वतंत्रता मनमानी की अनुमति नहीं देती।
ACTING CHIEF JUSTICE SANJEEV PRAKASH SHARMA -USTICE BALJINDER SINGH SANDHU, Sunil Samdaria Versus State Of Rajasthan, 2/12/ 2025
4 राजस्थान हाईकोर्ट की जयपुर पीठ ने “live-in relationship” को लेकर ऐतिहसिक और महत्वपूर्ण फैसला देते हुए कहा हैं कि दो बालिग युवक-युवती जिनकी भले ही विवाह योग्य उम्र पूरी न हुई हो, लेकिन वे अपनी मर्ज़ी से साथ रहने का पूरा अधिकार रखते हैं.
जस्टिस अनुप कुमार ढंड की एकलपीठ ने कोटा निवासी युवति और युवक की ओर से जान की सुरक्षा को लेकर दायर याचिका पर सुनवाई करते हुए ये फैसला दिया हैं.
JUSTICE ANOOP KUMAR DHAND,
5 राजस्थान हाईकोर्ट ने झूठे मुकदमों और झूठे वाद के मामले में एक महत्वपूर्ण रिपोर्टेबल जजमेंट में बड़ी कानूनी व्यवस्था को स्पष्ट करते हुए कहा है कि IPC की धारा 211 यानी झूठा मुकदमा दर्ज कराने के मामलों में पुलिस अधिकारी द्वारा सीधे शिकायत दायर करना कानूनन अवैध है, क्योंकि CrPC की धारा 195(1)(b)(i) के अनुसार यह अधिकार केवल संबंधित अदालत को ही है।
जस्टिस अनुप कुमार ढंड की एकलपीठ ने यह महत्वपूर्ण आदेश याचिकाकर्ता Dev Narayan Gurjar की याचिका पर सुनवाई करते हुए दिए हैं।
JUSTICE ANOOP KUMAR DHAND, Dev Narayan Gurjar Versus State of Rajasthan, 27/11/2025
6 राजस्थान हाईकोर्ट जोधपुर मुख्यपीठ से एक महत्वपूर्ण फैसला सामने आया है, जिसमें परिवार पेंशन के अधिकार को लेकर दो महिलाओं के बीच छिड़े विवाद पर हाईकोर्ट ने गंभीर टिप्पणी करते हुए स्पष्ट किया है कि वैधानिक रूप से मान्य पत्नी के अधिकारों से कोई समझौता नहीं किया जा सकता।
जस्टिस फरजंद अली की एकलपीठ ने अपने रिपोर्टेबल और ऐतिहासिक फैसले में कहा कि “हिंदू व्यक्तिगत कानून में ‘पहली पत्नी’ और ‘दूसरी पत्नी’ की कोई अवधारणा ही नहीं है। वैध विवाह यदि जीवित है, तो उसके रहते की गई दूसरी शादी को विधिक मान्यता प्राप्त नहीं होती।”
JUSTICE FARJAND ALI, Smt. Anand Kanwar Versus State Of Rajasthan, 04/12/2025
7 राजस्थान हाईकोर्ट ने पुलिस विभाग द्वारा बर्खास्त किए गए कांस्टेबल की पुन: बहाली का आदेश देते हुए किसी कर्मचारी को सेवा से हटाने को उसकी आर्थिक मृत्यु के समान बताया हैं.
जस्टिस फरजंद अली की एकलपीठ ने नागौर निवासी याचिकाकर्ता शंकरराम की ओर से दायर याचिका पर सुनवाई करते हुए यह आदेश दिया हैं.
हाईकोर्ट ने अपने फैसले में कहा कि पुलिस जैसे अनुशासित विभाग में नैतिकता और ईमानदारी के मानक जरूर ऊँचे होने चाहिए, परंतु इसका यह अर्थ नहीं कि किसी कर्मचारी को केवल अनुमान या प्रारंभिक जांच के आधार पर बर्खास्त कर दिया जाए.
JUSTICE FARJAND ALI, Shankar Ram Versus The State Of Rajasthan, 04/12/2025
8 राजस्थान हाईकोर्ट ने शैक्षणिक संस्थानों द्वारा फीस वसूलने के लिए छात्रों के दस्तावेज़ों को रोककर हथियार बनाने को बेहद गंभीर मानते हुए इसे असंवैधानिक बताया है।
राजस्थान हाईकोर्ट ने जयपुर नेशनल यूनिवर्सिटी (JNU) इंस्टीट्यूट ऑफ मेडिकल साइंसेज एंड रिसर्च सेंटर की एक छात्रा के मूल दस्तावेज़ वापस नहीं करने के मामले में यूनिवर्सिटी को कड़ी फटकार लगाते हुए तत्काल याचिकाकर्ता छात्रा के मूल दस्तावेज़ लौटाने के आदेश दिए हैं।
JUSTICE ANUROOP SINGHI, Eshita Gupta Versus Jaipur National University & Anr., 03/12/2025
9 राजस्थान हाईकोर्ट ने अपनी पसंद से विवाह करने वाले अलवर जिले के नवविवाहित युगल को सुरक्षा उपलब्ध नहीं कराने पर पुलिस को कड़ी फटकार लगाते हुए सुरक्षा देने के आदेश दिए हैं. नवविवाहित युवक–युवती ने अपनी पसंद से विवाह किया था, जिसके बाद उनके परिजनों द्वारा गंभीर धमकियाँ देने की शिकायत कि गयी थी. लेकिन शिकायत के बाद भी पुलिस ने सुरक्षा प्रदान नहीं की.
जस्टिस अनुप कुमार ढंड की एकलपीठ ने मामले में टिप्पणी करते हुए कहा कि संविधान का अनुच्छेद 21 हर नागरिक को जीवन और व्यक्तिगत स्वतंत्रता का अधिकार देता है। किसी भी तरह की धमकी इस मौलिक अधिकार का उल्लंघन है।
JUSTICE ANOOP KUMAR DHAND, 01/12/2025
10 राजस्थान हाईकोर्ट की जयपुर पीठ ने श्री करण नरेंद्र कृषि विश्वविद्यालय, जोबनेर के कुलपति डॉ. बलराज सिंह के निलंबन पर बड़ा फैसला सुनाते हुए राज्यपाल (कुलाधिपति) द्वारा जारी निलंबन आदेश को रद्द कर दिया है।
जस्टिस अशोक कुमार जैन की एकलपीठ की ओर से दिए गए रिपोर्टेबल जजमेंट में कहा गया कि राज्यपाल ने कृषि विश्वविद्यालय अधिनियम, 2013 की धारा 25-ए(1) के तहत राज्य सरकार से परामर्श किए बिना निलंबन का आदेश जारी किया, जो कानूनी प्रक्रिया के विपरीत है।
JUSTICE ASHOK KUMAR JAIN, Dr. Balraj Singh Versus Chancellor, 14/10/2025