वर्ष 2025 राजस्थान की राजनीति के लिए केवल चुनावी बयानबाज़ी और सियासी संघर्ष का साल नहीं रहा, बल्कि यह साल अदालतों में नेताओं की कानूनी परीक्षा का भी गवाह बना।
मंत्री रहे नेताओं की गिरफ्तारी, विधायकों को जेल की सजा, सांसदों को नोटिस तामील के लिए अख़बारों का सहारा और वहीं दूसरी ओर हाईकोर्ट व उपभोक्ता अदालतों से मिली बड़ी राहत-राजस्थान की न्यायिक कार्यवाही इस वर्ष सत्ता और सियासत के हर बड़े चेहरे तक पहुँची।
इस साल अदालतों की चौखट पर पूर्व मंत्री महेश जोशी, विधायक कंवरलाल मीणा, मुकेश भाकर, मनीष यादव से लेकर उपमुख्यमंत्री दियाकुमारी, भाजपा प्रदेशाध्यक्ष मदन राठौड़, सांसद हनुमान बेनीवाल और शोभारानी कुशवाहा जैसे नाम सुर्खियों में रहे। कहीं वर्षों पुराने मामलों में सजा सुनाई गई, तो कहीं जांच, गिरफ्तारी और जमानत के बीच नेताओं की सियासी ज़मीन हिलती दिखी।
उपभोक्ता अदालत से लेकर राजस्थान हाईकोर्ट और सुप्रीम कोर्ट तक, 2025 में न्यायपालिका केवल कानून की व्याख्या का मंच नहीं रही, बल्कि सत्ता, जवाबदेही और लोकतंत्र के संतुलन की निर्णायक भूमिका में दिखी।
यह विशेष रिपोर्ट उसी साल की कहानी कहती है, जब राजस्थान की अदालतों में तारीखें नहीं, फैसले इतिहास बनते नजर आए।
1 पीएम नरेंद्र मोदी – हिंसा के लिए जिम्मेदार बताने वाली याचिका खारिज
राजस्थान हाईकोर्ट ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, गृह मंत्री अमित शाह सहित अन्य के खिलाफ याचिका दायर करने वाले अधिवक्ता पर ₹50,000 की कोस्ट लगाते हुए याचिका को खारिज कर दिया है।
अधिवक्ता पूरन चंदर सेन ने यह आरोप लगाते हुए शिकायत दर्ज कराने की मांग की थी कि सीएए (नागरिकता संशोधन अधिनियम) 2019 के विरोध प्रदर्शनों के दौरान हुई हिंसा के लिए प्रधानमंत्री, गृह मंत्री और अन्य जिम्मेदार थे।
जस्टिस सुदेश बंसल की एकलपीठ ने पूरन चंदर सेन की ओर से दायर याचिका पर सभी पक्षों की बहस सुनने के बाद मंगलवार को अपना फैसला सुरक्षित रखा था। हाईकोर्ट ने अपने आदेश में सख्त टिप्पणी करते हुए कहा कि यह याचिका बिना आधार, बोगस और राजनीतिक रूप से प्रेरित है, जिसे केवल सस्ती पब्लिसिटी के लिए दायर किया गया है।
निचली अदालत और सेशन कोर्ट ने मामले में एफआईआर दर्ज करने से इंकार कर दिया था, जिसके बाद यह मामला हाईकोर्ट में दायर हुआ।
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2 मदन राठौड़ -9 साल बाद उपभोक्ता अदालत से राहत
बीजेपी प्रदेशाध्यक्ष मदन राठौड़ की ओर से पाली के अप्रैल 2017 में उपभोक्ता अदालत में दायर किए गए एक परिवाद पर 9 साल बाद 13 नवंबर 2025 को फैसला सुनाया गया.
इंटरनेशनल यात्रा के लिए मदन राठौड़ ने वर्ष 2016 में BSNL से सिम खरीदी थी, BSNL ने यह सीम शुरू ही नहीं कि जबकि मदन राठौड़ अपनी यात्रा पूर्ण कर भारत लौट आए. सिम चालू नहीं होने के बावजूद BSNL की ओर से मदन राठौड़ को 1 लाख 9 हजार 654 रुपए का बिल थमा दिया.
पाली उपभोक्ता अदालत आयोग अध्यक्ष अजय कुमार बंसल और सदस्य शिवराम महिया ने मदन राठौड़ के पक्ष में फैसला सुनाते हुए BSNL को सेवा का दोषी माना और उस पर 80 हजार रूपयें का हर्जाना लगाया. जिसमें से 30 हजार रूपयें मदन राठौड़ को वही 50 हजार रूपयें उपभोक्ता कल्याण कोष में जमा कराने का आदेश दिया. अदालत ने मदन राठौड़ से वसूली गई राशि को ब्याज सहित लौटाने के भी आदेश दिए.
3 महेश जोशी-गिरफतारी, जेल ओर रिहाई
वर्ष 2025 के चर्चित मामलो में पूर्ववर्ती कांग्रेस सरकार के समय जलदाय मंत्री रहे महेश जोशी की गिरफतारी का मामला सबसे ज्यादा सुर्खियों में रहा. जल जीवन मिशन में कथित 900 करोड़ के घोटाले के मामले में महेश जोशी की मुश्किलें तब बढी जब एक आरोपी की जमानत याचिका मंजूर करते हुए दिसंबर 2024 में सुप्रीम कोर्ट ने पूर्व मंत्री महेश जोशी को मामले में आरोपी नही बनाए जाने पर सवाल खड़े किए.
सुप्रीम कोर्ट के बाद राजस्थान हाईकोर्ट ने भी दूसरे आरोपियों की जमानत याचिका पर ED के इसी रवैये पर सवाल खड़े किए. ED की कार्यवाही पर खड़े हुए सवालों के बाद 24 अप्रेल 2024 को लंबी पूछताछ के बाद महेश जोशी को गिरफतार कर लिया गया.
ED का आरोप था कि एक निजी फर्म ने जोशी के बेटे की कंपनी को रिश्वत के तौर पर 50 लाख रुपये दिए थे। गिरफतारी के कुछ दिन बाद ही पत्नी के निधन पर महेश जोशी को दो बार अस्थायी पैरोल पर रिहा किया गया.
लेकिन उसके बाद जिला अदालत और हाईकोर्ट से महेश जोशी को कोई राहत नहीं मिली. करीब साढ़े 7 माह जेल में बिताने के बाद हाल ही में 3 दिसंबर 2025 को महेश जोशी को जमानत पर रिहा करने का आदेश दिया.
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4 शांति धारीवाल – एकलपट्टा प्रकरण में बढी मुश्किलें
राजस्थान के वरिष्ठ कांग्रेस विधायक और पूर्व मंत्री शांति धारीवाल के लिए वर्ष 2025 आसान नहीं रहा हैं. सुप्रीम कोर्ट ने 1 दिसंबर 2025 को शांति धारीवाल की ओर से दायर विशेष अनुमति याचिका (एसएलपी) को खारिज कर दिया जिसके जरिए धारीवाल ने राजस्थान हाईकोर्ट के 1 नवंबर को चुनौती दी थी.
1 नवंबर 2025 को राजस्थान हाईकोर्ट ने अपने फैसले में क्लोजर रिपोर्ट हटाने का फैसला बरकरार रखा था और ACB को फिर जांच की अनुमति दे दी। Rajasthan High court के इसी आदेश को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी गई।
हालांकि, धारीवाल को बड़ी राहत देते हुए सुप्रीम कोर्ट ने एसीबी कोर्ट में लंबित प्रोटेस्ट पिटीशन के निस्तारण तक धारीवाल की गिरफ्तारी पर अंतरिम रोक लगा दी है। सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद अब यह मामला फिर से जयपुर विशेष अदालत पीसी एक्ट में सुनवाई के लिए आ गया है।
अधीनस्थ अदालत अब क्लोजर रिपोर्टों के खिलाफ दायर प्रोटेस्ट पिटीशन पर सुनवाई कर निर्णय लेगी, वहीं राजस्थान राज्य द्वारा क्लोजर रिपोर्ट वापस लेने के लिए दायर आवेदन पर सुनवाई के बाद फैसला करेगी।
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5 सांसद राव राजेन्द्रसिंह – अखबार के जरिए नोटिस तामिल
लोकसभा चुनाव 2024 के दौरान जयपुर ग्रामीण लोकसभा में मतपत्रों की पुन: गणना से जुड़े विवाद में हाईकोर्ट में दायर चुनाव याचिका के नोटिस सांसद राव राजेन्द्रसिंह को तामिल कराने के लिए अखबार में पब्लिकेशन के आदेश दिए.
कोर्ट के बार-बार आदेश के बावजूद सांसद राव राजेंद्र सिंह को नोटिस तक तामील नहीं हुए थे, जिस पर मामले में कांग्रेस के प्रत्याशी रहे अनिल चौपड़ा ने एक प्रार्थना पत्र दायर कर राजस्थान हाईकोर्ट से मांग की थी.
जिसके बाद Rajasthan Highcourt ने 20 अक्टूबर 2025 को पेपर पब्लिकेशन के जरिए नोटिस तामील करवाने का आदेश दिया.
सांसद राव राजेंद्र सिंह पर पेपर पब्लिकेशन के जरिए नोटिस तामील करवाने का आदेश देते हुए Rajasthan Highcourt ने सांसद को 1 नवंबर को तलब भी किया था.
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6 हनुमान बेनीवाल – घर खाली कराने के नोटिस से राहत तक
नागौर सांसद और आरएलपी नेता हनुमान बेनीवाल को जयपुर के सरकारी आवास खाली करने के लिए संपदा अधिकारी एंव अतिरिक्त जिला मजिस्ट्रेट ने 3 जुलाई 2025 को बेदखली नोटिस जारी किए थे.
राजस्थान हाईकोर्ट ने 16 सितंबर को सांसद हनुमान बेनीवाल की याचिका पर सुनवाई करते हुए जयपुर के जालूपुरा और ज्योति नगर स्थित सरकारी आवास खाली कराने के मामले में बड़ी राहत देते हुए संपदा अधिकारी के यहां चल रही कार्रवाई पर रोक लगा दी है।
जस्टिस समीर जैन की एकलपीठ ने बेनीवाल की याचिका पर सुनवाई करते हुए राज्य सरकार, संपदा अधिकारी को नोटिस जारी कर जवाब तलब किया हैं.
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7 विधायक मुकेश भाकर- मनीष यादव को सजा और राहत
कांग्रेस के दो विधायक मुकेश भाकर और मनीष यादव उस समय चर्चा में आए जब जयपुर महानगर प्रथम के एडिशनल चीफ ज्यूडिशियल मजिस्ट्रेट 19 की अदालत ने दोनो विधायकों कोमें 1—1 साल की सजा सुनाई.
अदालत ने 11 साल पहले 13 अगस्त 2014 राजस्थान यूनिवर्सिटी के मेन गेट के बाहर सड़क जाम करने और भीड़ इकट्ठा करने के मामले में कांग्रेस पार्टी के दोनों विधायकों को दोषी घोषित किया.
कोर्ट ने शाहपुरा सीट से विधायक मनीष यादव और लाडनूं सीट के विधायक मुकेश भाकर दोनों विधायकों को एक-एक साल की सजा सुनाई है. अदालत ने सजा सुनाने के साथ दोनो को जमानत भी दी.
आदेश के खिलाफ अपील करने पर जयपुर की एडीजे कोर्ट संख्या 9 ने 15 जुलाई 2025 दोनो विधायकों के साथ ही सात अन्य की सजा को अपील के निस्तारण होने तक स्थगित कर दिया.
8 दियाकुमारी – 2500 करोड़ की संपंति पर दावा खारिज
प्रदेश की उपमुख्यमंत्री दियाकुमारी को निजी मामले में उस समय बड़ा झटका लगा जब राजस्थान हाईकोर्ट के बाद सुप्रीम कोर्ट ने भी जयपुर स्थित टाउन हॉल और होमगार्ड कार्यालय परिसर के कब्जे को लेकर पद्मिनी देवी, दीयाकुमारी व अन्य की अपीलों राहत नहीं मिली.
राजस्थान हाईकोर्ट ने 20 अप्रैल 2025 को फैसला सुनाते हुए जयपुर के पुराने विधानसभा भवन (टाऊन हॉल), पुराना पुलिस मुख्यालय व पुराना होमगार्ड महानिदेशालय तथा जलेब चौक स्थित पुराने लेखाकार कार्यालय परिसर की करीब ढाई हजार करोड़ रुपए की सम्पत्ति पर हाईकोर्ट राजपरिवार के दावें को खारिज कर दिया.
जस्टिस अशोक कुमार जैन ने राज्य सरकार की चार रिवीजन याचिकाओं को मंजूर करते हुए यह आदेश दिया था. कोर्ट ने कहा कि ये संपत्तियां वर्ष 1949 में जयपुर रियासत और भारत सरकार के बीच हुए समझौते का हिस्सा हैं, जिनका उपयोग सरकारी प्रयोजन के लिए किया जाना था और इस संदर्भ में कोई भी सिविल वाद संविधान के अनुच्छेद 363 के तहत न्यायालय की समीक्षा से बाहर है.
हाईकोर्ट के फैसले के खिलाफ पद्मिनी देवी, दीया कुमारी और पद्मनाभ सिंह समेत जयपुर राजपरिवार के सदस्यों ने सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर की. मामले की सुनवाई करते हुए सुप्रीम कोर्ट ने राजस्थान सरकार को नोटिस जारी किए, लेकिन मामले में बेहद अहम टिप्पणी भी की.
सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि ऐसे तो एक दिन पुरा जयपुर आपका हो जाएगा.
9 कंवरलाल मीणा- विधायकी जाने से लेकर जेल तक
अंता से पूर्व भाजपा विधायक कंवरलाल मीणा को 20 साल पुराने एक मामले में मिली 3 साल की सजा के चलते ना केवल विधायकी गवांनी पड़ी बल्कि उन्हे सरेंडर कर जेल जाना पड़ा.
2005 में अंता के खाताखेड़ी गांव के सरपंच के उपचुनाव में कंवरलाल मीणा ने पुर्नमतदान को लेकर तत्कालिन एसडीएम पर पिस्तौल तान दी. मामले में स्थानीय पुलिस थाने में कंवरराम के खिलाफ मामला दज किया गया.
इस मामले में झालावाड़ की एडीजे अकलेरा कोर्ट ने 14 दिसंबर 2020 को कंवरलाल मीणा को 3 साल की सजा सुनाई थी, जिसे हाईकोर्ट ने भी बरकरार रखा था.
7 मई 2025 को सुप्रीम कोर्ट ने भी कंवरलाल मीणा की याचिका को खारिज करते हुए सरेंडर करने का आदेश दिया.
सुप्रीम कोर्ट से भी राहत नहीं मिलने पर कंवरवलाल मीणा ने 21 मई को कोर्ट में सरेंडर किया. जिसके बाद विधानसभा ने भी कंवरलाल मीणा की विधायकी को 1 मई से समाप्त कर दिया गया.
10 विनोद जाखड़ – प्रदर्शन, जेल और जमानत
राजस्थान विश्वविद्यालय परिसर में 30 सितंबर 2025 को राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) की ओर से शस्त्र पूजन कार्यक्रम रखा गया था.
NSUI प्रदेश अध्यक्ष विनोद जाखड़ के नेतृत्व में इसका विरोध किया गया. प्रदर्शन के चलते पुलिस ने विनोद जाखड़ को गिरफतार किया. जिसके बाद अदालत ने विनोद जाखड़ को जेल भेज दिया.
जेल के दौरान कांग्रेस से जुड़े कई दिग्गज नेताओं ने जेल जाकर विनोद जाखड़ से मुलाकात की. जाखड़ को जेल भेजने के मामले पर राजनीतिक दलों ने एक दूसरे पर आरोप लगाए.
जिला अदालत द्वारा मामले में जमानत खारिज करने पर विनोद जाखड़ ने राजस्थान हाईकोर्ट में याचिका दायर की.
राजस्थान हाईकोर्ट ने विनोद जाखड़ को 17 अक्टूबर को जमानत पर रिहा करने का आदेश दिया.
11 शोभारानी कुशवाहा -धोखाधड़ी और साजिश के आरोपो से राहत
राजस्थान हाईकोर्ट ने धौलपुर से कांग्रेस विधायक शोभारानी कुशवाह के खिलाफ 8 साल पुराने आपराधिक मामले को रद्द करते हुए बड़ी राहत दी. 3 दिसंबर 2025 को जस्टिस समीर जैन की एकलपीठ ने फैसला सुनाते हुए 18 अक्टूबर 2022 और 12 मई 2023 के एडीजे कोर्ट के आदेशों को खारिज कर दिया।
एडीजे कोर्ट ने शोभारानी कुशवाहा के खिलाफ IPC की धारा 420, 406 और 120-B के तहत संज्ञान लिया था। विधायक के खिलाफ साल 2017 में भरतपुर में धोखाधड़ी और साजिश के आरोप में एफआईआर दर्ज हुई थी। पुलिस ने सह आरोपियों के खिलाफ आरोप प्रमाणित मानते हुए चालान पेश किया, लेकिन कोर्ट ने 18 अक्टूबर 2022 को शोभारानी कुशवाह के खिलाफ भी संज्ञान ले लिया।
इस आदेश के खिलाफ दायर पुनरीक्षण को भी एडीजे कोर्ट ने 12 मई 2023 को खारिज कर दिया। इन दोनों आदेशों को विधायक ने हाईकोर्ट में चुनौती दी थी। विधायक की ओर से पैरवी करते हुए वरिष्ठ वकील माधव मित्र ने कोर्ट को बताया कि याचिकाकर्ता एक महिला हैं और विपक्षी पार्टी की विधायक हैं। वे कंपनी में केवल शेयरधारक हैं और उनका कंपनी के दिन-प्रतिदिन के कार्यों से कोई संबंध नहीं है।
12 जयकृष्ण पटेल – 20 लाख की रिश्वत, जेल और बेल
बांसवाड़ा के बागीदौरा से भारत आदिवासी पार्टी (BAP) के विधायक जयकृष्ण पटेल को 20 लाख की रिश्वत के मामले में एसीबी ने गिरफतार किया था.
विधायक पर विधानसभा में खदान से जुड़े सवाल वापस लेने के लिए खदान मालिक से 2.5 करोड़ रुपए की रिश्वत मांगने का आरोप था.
5 मई 2025 में गिरफ्तारी के बाद जयपुर की विशेष भ्रष्टाचार निवारण न्यायालय (एसीबी अदालत) ने विधायक जयकृष्ण पटेल को जेल भेज दिया था.
जिला अदातल से जमानत खारिज होने के बाद जयकृष्ण पटेल ने राजस्थान हाईकोर्ट में याचिका दायर की थी.
हाईकोर्ट में जस्टिस अनिल कुमार उपमन की एकलपीठ ने 14 अगस्त 2025 को विधायक जयकृष्ण पटेल, विधायक के चचेरे भाई विजय कुमार पटेल, लक्ष्मण मीणा और जगराम मीणा को जमानत पर रिहा करने का आदेश दिया.
13 गिरीराज मलिंगा – धौलपुर से जयपुर केस ट्रांसफर
धौलपुर के बाड़ी स्थित डिस्कॉम कार्यालय में अभियंताओं के साथ मारपीट के बहुचर्चित मामले में तत्कालीन कांग्रेस विधायक गिर्राज सिंह मलिंगा को सुप्रीम कोर्ट से बड़ा झटका लगा है।
सुप्रीम कोर्ट ने 7 नवंबर 2025 को उनकी विशेष अनुमति याचिका (SLP) को खारिज करते हुए राजस्थान हाईकोर्ट के उस आदेश को बरकरार रखा है, जिसमें मामले की सुनवाई धौलपुर से जयपुर जिला न्यायालय में स्थानांतरित करने के निर्देश दिए गए थे।
सुप्रीम कोर्ट ने स्पष्ट रूप से कहा कि हाईकोर्ट द्वारा पारित आदेश में किसी प्रकार का हस्तक्षेप करने का कोई आधार नहीं है। इसके साथ ही अदालत ने मामले की गंभीरता को देखते हुए जयपुर पुलिस आयुक्त को गवाहों की सुरक्षा सुनिश्चित करने और सुनवाई प्रक्रिया की निगरानी के निर्देश देने पर भी सहमति जताई।
यह मामला 28 मार्च 2022 का है, जब धौलपुर जिले के बाड़ी स्थित विद्युत वितरण निगम (डिस्कॉम) कार्यालय में तत्कालीन कांग्रेस विधायक गिर्राज सिंह मलिंगा पर आरोप लगा कि उन्होंने कार्यालय में कार्यरत AEN हर्षदापति और JEN नितिन गुलाटी के साथ मारपीट की।
राजस्थान हाईकोर्ट ने जुलाई 2025 में सुनवाई को धौलपुर से जयपुर स्थानांतरित करने का आदेश दिया। हाईकोर्ट के इस आदेश को गिर्राज सिंह मलिंगा ने सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी थी।
14 हरलाल सहारण -विधायक चुना जाना अच्छी छवि का प्रमाण नहीं
23 मई 2025 को राजस्थान हाईकोर्ट ने फर्जी मार्कशीट मामले में चूरू विधायक हरलाल सहारण के खिलाफ चल रहे आपराधिक मुकदमे को वापस लेने की राज्य सरकार की याचिका खारिज कर दी है। जस्टिस इंद्रजीत सिंह और जस्टिस भुवन गोयल की खंडपीठ ने स्पष्ट शब्दों में कहा कि केवल विधायक चुना जाना किसी आरोपी की अच्छी छवि का प्रमाण नहीं हो सकता।
कोर्ट ने सरकार की दलीलों को अस्वीकार करते हुए कहा कि वह यह साबित करने में असफल रही कि मुकदमा वापस लेने से न्याय के व्यापक हित कैसे पूरे होंगे। अदालत ने टिप्पणी की कि यह आवेदन सद्भावना के बजाय कानूनी प्रक्रिया को दबाने का प्रयास प्रतीत होता है।
मामला वर्ष 2015 का है, जब हरलाल सहारण पर जिला परिषद चुनाव के दौरान 10वीं कक्षा की फर्जी मार्कशीट लगाने का आरोप लगा। जांच में उत्तराखंड बोर्ड ने रोल नंबर और स्कूल दोनों को फर्जी बताया था। पुलिस ने धोखाधड़ी व जालसाजी सहित अन्य धाराओं में चार्जशीट पेश की।
हाईकोर्ट के इस फैसले के बाद अब मुकदमे की सुनवाई सरदारशहर की अदालत में जारी रहेगी।
15 मदन दिलावर -भवानीसिंह राजावत
राज्य के शिक्षा मंत्री मदन दिलावर और वरिष्ठ BJP नेता भवानी सिंह राजावत के लिए वर्/ा 2025 काफी राहत भरा रहा. दोनो नेताओं के खिलाफ दर्ज तीन आपराधिक मुकदमों को राजस्थान सरकार ने वापस लेने का फैसला लिया.
सरकार के प्रार्थना पत्र पर राजस्थान हाईकोर्ट से भी दोनो नेताओं को बड़ी राहत मिली. जस्टिस अनूप कुमार ढंढ की एकलपीठ ने दोनो नेताओं के खिलाफ दर्ज तीन आपराधिक मामलों को वापस लेने की अनुमति दे दी.राज्य सरकार की ओर से इन मामलों को वापस लेने के लिए हाईकोर्ट में प्रार्थना पत्र दायर किया गया था।
शिक्षा मंत्री मदन दिलावर के खिलाफ वर्ष 2021 में कोटा के रामगंज मंडी थाने में दो मामले दर्ज हुए थे, जबकि भवानी सिंह राजावत के खिलाफ वर्ष 2011 में कोटा के सुल्तानपुर थाने में एक मामला दर्ज था। कोर्ट ने सरकार के तर्कों से सहमति जताते हुए सभी प्रार्थना पत्र स्वीकार कर लिए।