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संस्कृत शिक्षा विभाग के गेस्ट फैकल्टी को राजस्थान हाईकोर्ट से राहत: नियमित भर्ती तक नहीं हटाए जाएंगे शिक्षक, तीन शर्तों के साथ मिली राहत

Rajasthan High Court Clarifies Sealed Cover Rule In Promotion Cases

जयपुर: संस्कृत शिक्षा विभाग में काम कर रहे गेस्ट फैकल्टी और मानदेय शिक्षकों को राजस्थान हाई कोर्ट से बड़ी राहत मिली है।

राजस्थान हाई कोर्ट ने साफ कहा है कि उन्हें सिर्फ इसलिए नौकरी से नहीं हटाया जा सकता क्योंकि वे नियमित कर्मचारी नहीं हैं।

हाईकोर्ट कोर्ट ने कहा है कि नियमित कर्मचारी या राजस्थान लोक सेवा आयोग (आरपीएससी) से चयनित अभ्यर्थी की नियुक्ति होने तक उन्हें उनके पद से नहीं हटाया जाएगा।

हालांकि, यह राहत तीन शर्तों के साथ मिलेगी। संबंधित विषय में पर्याप्त छात्र होने चाहिए और मानदेय भी राज्य सरकार की तय व्यवस्था के अनुसार ही मिलेगा।

जस्टिस रेखा बोराना की एकल पीठ ने यह आदेश संस्कृत शिक्षा विभाग के 13 गेस्ट फैकल्टी की ओर से दायर याचिका पर सुनाया।

सुनवाई के दौरान याचिकाकर्ताओं ने कहा कि उनका मामला पहले दिए गए डिवीजन बेंच के फैसले से पूरी तरह मिलता-जुलता है।

राज्य सरकार की ओर से भी इस बात का विरोध नहीं किया गया। इसके बाद कोर्ट ने उसी फैसले की शर्तों को लागू करते हुए याचिका का निस्तारण कर दिया।

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गेस्ट फैकल्टी ने क्यों दायर की याचिका ?

यह याचिका राजस्थान के अलग-अलग सरकारी संस्कृत कॉलेजों में कार्यरत 13 गेस्ट फैकल्टी और मानदेय शिक्षकों ने दायर की थी।

सभी याचिकाकर्ता लंबे समय से पढ़ा रहे थे, लेकिन उन्हें इस बात की चिंता थी कि नियमित भर्ती की प्रक्रिया या अन्य प्रशासनिक फैसलों के कारण उनकी सेवाएं कभी भी समाप्त की जा सकती हैं।

उनका कहना था कि वे लंबे समय से पढ़ा रहे हैं, लेकिन नियमित भर्ती की प्रक्रिया पूरी होने तक उनकी सेवाएं जारी रहनी चाहिए।

सुनवाई के दौरान याचिकाकर्ताओं की ओर से कहा गया कि उनका मामला पहले दिए गए डिवीजन बेंच के फैसले से पूरी तरह मिलता-जुलता है।

इसलिए उन्हें भी वही राहत मिलनी चाहिए, जो पहले समान परिस्थितियों वाले शिक्षकों को दी जा चुकी है। उनका कहना था कि जब तक नियमित भर्ती पूरी नहीं हो जाती, तब तक उन्हें पढ़ाने का मौका मिलता रहना चाहिए।

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सुनवाई के दौरान सरकार ने क्या कहा?

सुनवाई के दौरान संस्कृत शिक्षा विभाग की ओर से पेश वकील ने यह नहीं कहा कि मौजूदा मामला पहले वाले फैसले से अलग है।

सरकार की ओर से कोर्ट को बताया गया कि अगर कोर्ट उचित समझे तो इस याचिका का निस्तारण भी उसी फैसले के अनुसार किया जा सकता है।

दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद कोर्ट ने माना कि इस मामले में अलग से कोई नया कानूनी सवाल नहीं है। इसलिए पहले दिए गए फैसले को ही लागू किया जाना उचित होगा।

पुराने फैसले के आधार पर मिली राहत

हाई कोर्ट ने अपने आदेश में सितंबर 2025 में दिए गए डिवीजन बेंच के फैसले का हवाला दिया। उस फैसले में भी गेस्ट फैकल्टी की सेवा जारी रखने का मुद्दा उठाया गया था।

कोर्ट ने माना कि मौजूदा याचिका के तथ्य भी उसी तरह के हैं। इसलिए अलग आदेश देने के बजाय पहले से तय शर्तों को ही लागू किया गया।

कोर्ट ने यह भी माना कि जब समान परिस्थितियों वाले मामले में पहले ही फैसला दिया जा चुका है और सरकार ने भी उसका विरोध नहीं किया है, तो उसी आधार पर मौजूदा याचिका का भी निस्तारण किया जा सकता है।

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हाईकोर्ट ने किन शर्तों पर दी राहत?

हाईकोर्ट ने कहा कि गेस्ट फैकल्टी को राहत मिलेगी, लेकिन इसके लिए तीन शर्तें पूरी करनी होंगी—

  1. नियमित नियुक्ति तक ही सेवा: गेस्ट फैकल्टी अपने पद पर तब तक बने रहेंगे, जब तक उस पद पर नियमित कर्मचारी या आरपीएससी से चयनित अभ्यर्थी नियुक्त नहीं हो जाता।
  2. छात्रों की संख्या जरूरी: जिस विषय के लिए गेस्ट फैकल्टी की नियुक्ति हुई है, उसमें पर्याप्त संख्या में छात्र होने चाहिए। अगर छात्रों की संख्या पर्याप्त नहीं होगी, तो यह राहत लागू नहीं रहेगी।
  3. मानदेय पहले की तरह मिलेगा: गेस्ट फैकल्टी को 800 रुपये प्रति घंटा मानदेय मिलता रहेगा। अगर भविष्य में राज्य सरकार इस दर में बदलाव करती है, तो वही नई दर लागू होगी।

हाईकोर्ट का अंतिम आदेश

राजस्थान हाईकोर्ट ने सभी 13 याचिकाकर्ताओं की याचिका का निस्तारण करते हुए उन्हें पहले दिए गए डिवीजन बेंच के फैसले के अनुसार राहत दे दी।

कोर्ट ने कहा कि नियमित कर्मचारी या आरपीएससी से चयनित अभ्यर्थी आने तक गेस्ट फैकल्टी अपने पद पर बने रहेंगे। हालांकि, यह राहत तभी तक लागू रहेगी, जब तक संबंधित विषय में पर्याप्त छात्र उपलब्ध हैं। इसके साथ ही कोर्ट ने कहा कि उन्हें वर्तमान व्यवस्था के अनुसार मानदेय मिलता रहेगा या फिर राज्य सरकार समय-समय पर जो नई दर तय करेगी, वही लागू होगी।

साथ ही, कोर्ट ने लंबित सभी आवेदनों और स्थगन याचिका का भी निस्तारण कर दिया।

आदेश का असर

राजस्थान हाईकोर्ट के इस आदेश से संस्कृत शिक्षा विभाग में कार्यरत गेस्ट फैकल्टी और मानदेय शिक्षकों को तत्काल राहत मिली है। इससे ऐसे शिक्षकों को नियमित भर्ती पूरी होने तक सेवा जारी रखने का अवसर मिलेगा।

हालांकि, कोर्ट ने यह भी स्पष्ट कर दिया है कि यह कोई स्थायी नियुक्ति नहीं है। जैसे ही संबंधित पद पर नियमित कर्मचारी या आरपीएससी से चयनित अभ्यर्थी नियुक्त होगा, यह राहत अपने आप समाप्त हो जाएगी। इसी तरह, यदि किसी विषय में छात्रों की संख्या पर्याप्त नहीं रहती, तो उस स्थिति में भी गेस्ट फैकल्टी को सेवा में बनाए रखने की शर्त खत्म हो जाएगी।

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