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राजस्थान हाईकोर्ट ने निलंबित पुलिसकर्मी को दी बड़ी राहत, सरकार का निलंबन आदेश रद्द; ट्रांसफर और मुख्यालय बदलने पर लगाई रोक

Rajasthan High Court Quashes Transfer Order of Suspended Police Constable

जोधपुर। राजस्थान हाईकोर्ट ने एक निलंबित पुलिसकर्मी की याचिका मंजूर करते हुए उनके खिलाफ जारी ट्रांसफर और मुख्यालय बदलने के आदेश को रद्द कर दिया है।

जस्टिस बिपिन गुप्ता की बेंच ने पहले दिए गए फैसलों के आधार पर निलंबित पुलिसकर्मी भंवर लाल विश्नोई को राहत दी।

हाईकोर्ट ने माना कि पुलिस कांस्टेबल और हेड कांस्टेबल के ट्रांसफर की सीमा तय है। प्रशासनिक आदेशों के जरिए नियुक्ति अथवा अनुशासनिक अथॉरिटी से जुड़े नियमों को नजरअंदाज नहीं किया जा सकता।

राज्य सरकार की ओर से राज सिंह भाटी, सरकारी वकील (Government Counsel), दीपक चंडक, अतिरिक्त अतिरिक्त महाधिवक्ता (AAAG) और सुलोचना बिश्नोई, अतिरिक्त महाधिवक्ता (AAG), बीएल भाटी की ओर से पेश हुए।

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निलंबन के दौरान मुख्यालय बदलने को दी थी चुनौती

यह मामला निलंबित पुलिसकर्मियों का मुख्यालय उनकी मूल रेंज या यूनिट से बाहर भेजने से जुड़ा था।

भंवर लाल विश्नोई ने राजस्थान हाईकोर्ट में याचिका दायर कर निलंबन के दौरान उनका मुख्यालय बदलने के आदेश को चुनौती दी थी।

हालांकि सुनवाई के दौरान याचिकाकर्ता की ओर से कोई उपस्थित नहीं हुआ। वहीं, राज्य सरकार के वकीलों ने कोर्ट को बताया कि इसी तरह के मामलों में हाईकोर्ट पहले ही फैसला दे चुका है।

पुराने फैसलों का हवाला देते हुए सरकार ने भंवर लाल की याचिका भी उन्हीं के आधार पर तय करने का पक्ष रखा।।

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पहले भी हाईकोर्ट में उठ चुका है मुख्यालय बदलने का मामला

राज्य सरकार के वकीलों ने कोर्ट को बताया कि पुलिसकर्मियों का मुख्यालय उनकी मूल रेंज से बाहर बदलने का मामला पहले भी हाईकोर्ट में उठ चुका है।

राम निवास बिश्नोई बनाम राजस्थान राज्य एवं अन्य मामले में 17 जनवरी 2023 को फैसला दिया गया था। इस फैसले में कोर्ट ने पहले के न्यायिक फैसलों को आधार बनाते हुए पुलिसकर्मियों के मुख्यालय बदलने से जुड़े आदेशों को रद्द किया था।

इससे पहले दिनेश कुमार बनाम राजस्थान राज्य एवं अन्य मामले में 10 फरवरी 2022 को भी इसी मुद्दे पर सुनवाई हुई थी। उस मामले में निलंबित पुलिसकर्मियों का मुख्यालय चूरू से श्रीगंगानगर बदलने के आदेश को चुनौती दी गई थी।

हाईकोर्ट के सामने सवाल था कि क्या निलंबन के दौरान पुलिसकर्मियों का मुख्यालय उनकी मूल रेंज या यूनिट से बाहर बदला जा सकता है।

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सुभाष चंद्र मामले में हाईकोर्ट ने क्या कहा था?

सुनवाई के दौरान हाईकोर्ट ने सुभाष चंद्र बनाम राजस्थान राज्य एवं अन्य मामले में दिए गए फैसले का भी जिक्र किया।

इस मामले में कोर्ट ने कहा था कि कांस्टेबल और हेड कांस्टेबल की नियुक्ति का अधिकार संबंधित जिले के पुलिस अधीक्षक के पास होता है। उनका ट्रांसफर दूसरे जिले में करने से नियुक्ति और अनुशासनिक अथॉरिटी भी बदल जाती है।

हाईकोर्ट ने इस व्यवस्था से जुड़ी व्यावहारिक दिक्कतों पर भी सवाल उठाए थे। जैसे, ट्रांसफर के बाद पुलिसकर्मी के खिलाफ विभागीय जांच कौन करेगा, उसका सर्विस रिकॉर्ड कहां रखा जाएगा और छुट्टी से जुड़े मामलों को कौन देखेगा?

यानी कि कोर्ट ने कहा कि नियमों में यह साफ नहीं बताया गया है कि ऐसे पुलिसकर्मियों के सर्विस रिकॉर्ड, छुट्टी और विभागीय जांच से जुड़े मामलों को कौन संभालेगा।

नियमों में इन बातों का स्पष्ट प्रावधान नहीं होने पर सरकार केवल प्रशासनिक आदेश जारी कर इसका समाधान नहीं कर सकती।

डिवीजन बेंच ने भी तय की थी ट्रांसफर की सीमा

सुभाष चंद्र मामले में हाईकोर्ट की एकलपीठ के फैसले को डिवीजन बेंच ने सुरेंद्र खोखर मामले में बरकरार रखा था।

डिवीजन बेंच ने माना था कि नियमों के तहत कांस्टेबल और हेड कांस्टेबल का ट्रांसफर जिले के भीतर किया जा सकता है, जबकि असिस्टेंट सब इंस्पेक्टर (ASI) के ट्रांसफर की सीमा संबंधित रेंज तक है।

हाईकोर्ट ने यह भी माना कि ट्रांसफर के कारण सेवा रिकॉर्ड, वरिष्ठता और प्रमोशन जैसे मामलों में दिक्कतें पैदा हो सकती हैं। इसलिए पुलिसकर्मियों के ट्रांसफर में तय नियमों का पालन जरूरी है।

जांच प्रभावित होने की आशंका को पर्याप्त आधार नहीं माना था

पुराने मामलों में राज्य सरकार की ओर से दलील दी गई थी कि कुछ पुलिसकर्मी भ्रष्टाचार के मामलों का सामना कर रहे हैं। ऐसे में उन्हें दूसरे रेंज में भेजना जरूरी है, ताकि वे जांच को प्रभावित न कर सकें।

हालांकि, हाईकोर्ट ने इस तर्क को कांस्टेबल, हेड कांस्टेबल या ASI को उनकी निर्धारित सीमा से बाहर भेजने के लिए पर्याप्त नहीं माना था।

हाईकोर्ट ने कहा था कि इस तरह का तर्क पुलिस अधिकारियों और जांच एजेंसियों पर सरकार के भरोसे की कमी को भी दिखाता है।

पुराने फैसले के आधार पर याचिका मंजूर

हाईकोर्ट में राज्य सरकार के वकील ने स्वीकार किया कि भंवर लाल विश्नोई का मामला पहले तय हो चुके मामलों के दायरे में आता है।

इस पर हाईकोर्ट ने राम निवास विश्नोई मामले में दिए गए फैसले के आधार पर उनकी याचिका मंजूर कर ली।

हाईकोर्ट ने भंवर लाल के ट्रांसफर और मुख्यालय बदलने के आदेश को रद्द कर दिया। साथ ही लंबित आवेदन भी निस्तारित कर दिए।

इस तरह कोर्ट ने पहले से तय कानूनी स्थिति के आधार पर भंवर लाल को राहत दी। फैसले से स्पष्ट है कि पुलिसकर्मियों के ट्रांसफर और मुख्यालय बदलने के मामलों में संबंधित नियमों और तय सीमाओं का पालन जरूरी है।

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