जयपुर। वर्ष 2025 राजस्थान हाईकोर्ट के लिए न्यायिक दृष्टि से अत्यंत महत्वपूर्ण रहा। इस वर्ष दिए गए कई फैसलों ने न केवल कानून की व्याख्या को नई मजबूती दी, बल्कि सामाजिक सरोकारों, नागरिक अधिकारों और संवैधानिक मूल्यों की भी प्रभावी रक्षा की।
वर्ष 2025 में राजस्थान हाईकोर्ट के ऐतिहासिक फैसलों की इस पार्ट–2 श्रृंखला में ऐसे निर्णय शामिल किए जा रहे हैं, जिन्होंने समाज को नई दिशा देने के साथ न्यायिक सोच की प्रगतिशीलता को भी सामने रखा हैं.
पार्ट 1 के ऐतिहासिक और रिपोर्टेबल जजमेंट आप इस लिंक पर क्लीक कर पढ़ सकते हैं…
हाईकोर्ट ने कई मामलों में यह दोहराया कि कानून का उद्देश्य केवल दंड देना नहीं, बल्कि न्याय, समानता और मानवीय गरिमा की रक्षा करना है।
lawsandlegals.com के माध्यम से पाठकों को इन ऐतिहासिक फैसलों की विस्तृत रिपोर्ट, कानूनी विश्लेषण तथा रिपोर्टेबल जजमेंट की डिजिटल कॉपी उपलब्ध कराई जा रही हैं.ताकि कानून से जुड़े प्रत्येक व्यक्ति और आम नागरिक तक न्यायिक चेतना को सरल और सुलभ रूप में पहुँचाया जा सके।
पार्ट–2 | वर्ष 2025 के ऐतिहासिक फैसले
1 Rajasthan Highcourt ने एक महत्वपूर्ण और रिपोर्टेबल जजमेंट में यह स्पष्ट किया है कि “यदि कोई व्यक्ति यह जानते हुए कि उसके नाम पर केवल एक ही संपत्ति है और इसके बावजूद वह व्यापारिक उद्देश्य या लोन के लिए उसे बंधक रखता है, तो ऋण अदायगी न होने की स्थिति में संपत्ति की नीलामी एक स्वाभाविक परिणाम है।”
Rajasthan Highcourt ने कहा कि ऐसे में इस तरह के मामले को संविधान के अनुच्छेद 21 के तहत जीवन और आश्रय के अधिकार (Article 21) का उल्लंघन नहीं माना जा सकता।
कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश जस्टिस संजीव प्रकाश शर्मा और जस्टिस बलजिंदर सिंह संधू की खंडपीठ ने यह आदेश अलवर के कोटपूतली निवासी शंकरलाल सैनी व उनके 7 अन्य परिजनों की ओर से दायर याचिकाओं पर दिया है।
2 राजस्थान हाईकोर्ट ने एक ऐतिहासिक फैसले में स्पष्ट किया है कि संविधान के अनुच्छेद 21 के तहत शीघ्र सुनवाई (Speedy Trial) और व्यक्तिगत स्वतंत्रता (Personal Liberty) का मौलिक अधिकार केवल भारतीय नागरिकों का ही नहीं, बल्कि विदेशी नागरिकों को भी प्राप्त है।
जस्टिस अनुप कुमार ढंड की एकलपीठ ने राजस्थान के बहुचर्चित अवैध किडनी प्रत्यारोपण और मानव अंग तस्करी से जुड़े मामले में दायर दो आरोपियों की याचिकाओं पर सुनवाई करते हुए यह फैसला दिया है।
3 राजस्थान हाईकोर्ट की जयपुर पीठ ने एक शिक्षक द्वारा कक्षा 6 की बच्ची के साथ किए गए यौन दुव्यवहार के मामले में बेहद सख्त नाराजगी जताते हुए शिक्षक के इस कृत्य को “गंभीर, घोर अनैतिक एवं शिक्षक के पद की गरिमा के विपरीत” बताया है।
JUSTICE VINIT KUMAR MATHUR और JUSTICE RAVI CHIRANIA की खंडपीठ ने अपने फैसले में कहा कि:
“हमारे समाज में स्त्री और विशेषकर बच्चियों की सुरक्षा सर्वोच्च नैतिक सिद्धांत है। शिक्षा जैसे पवित्र पेशे से जुड़े व्यक्ति का ऐसा व्यवहार न केवल अनुशासनहीनता है, बल्कि यह समाज के लिए घातक और अस्वीकार्य है।”
4 राजस्थान हाईकोर्ट ने एक ऐतिहासिक फैसले में राज्य सरकार की अपील खारिज करते हुए यह स्पष्ट कर दिया है कि आयुर्वेद चिकित्सकों को भी वही सेवा और पेंशन संबंधी लाभ मिलेंगे, जो यूनानी और होम्योपैथी विभाग के चिकित्सकों को पहले से प्राप्त हैं।
जस्टिस डॉ. पुष्पेंद्र सिंह भाटी और जस्टिस संदीप तनेजा की खंडपीठ ने अपने फैसले में कहा कि सरकार ने स्वयं 1973 के नियमों (Rules of 1973) में संशोधन कर नियम 6 और 31 को बदला था, जिससे अस्थायी या तात्कालिक नियुक्तियों को भी उनकी प्रारंभिक नियुक्ति की तिथि से नियमित सेवा का दर्जा मिल गया था।
5 राजस्थान हाईकोर्ट की जयपुर पीठ ने रेलवे सुरक्षा बल (RPF) के तीन अधिकारियों से जुड़े एक बहुचर्चित रिश्वत मामले में महत्वपूर्ण फैसला सुनाते हुए ट्रायल कोर्ट द्वारा दी गई सजा को रद्द कर दिया है।
जस्टिस आनंद शर्मा की अदालत ने रिपोर्टेबल जजमेंट के जरिए फैसला देते हुए स्पष्ट किया कि रिश्वत के मामले में किसी को दोषी घोषित करने के लिए आरोपी के खिलाफ रिश्वत की स्पष्ट मांग (demand), उसकी स्वीकृति या बरामदगी (acceptance/recovery) और आरोपी के पास लंबित आधिकारिक कार्य (pendency of work)—इन तीनों तत्वों का संदेह से परे साबित होना अनिवार्य है।
6 Rajasthan Highcourt ने एक महत्वपूर्ण फैसले में स्पष्ट कर दिया है कि किसी भी परीक्षा परिणाम और उसकी उत्तर कुंजी (Answer Key) से जुड़े विवादों में अदालतों की भूमिका सीमित है।
कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश जस्टिस संजीव प्रकाश शर्मा और जस्टिस संजीत पुरोहित की खंडपीठ ने कहा कि जब तक परीक्षा नियमों में पुनर्मूल्यांकन (Re-evaluation) या उत्तरपत्रों की जांच की अनुमति न दी गई हो, तब तक अदालत को इस क्षेत्र में दखल नहीं देना चाहिए।
7 राजस्थान हाईकोर्ट जोधपुर मुख्यपीठ ने दिवंगत पूर्व जिला एवं सत्र न्यायाधीश बी.डी. सरस्वत के निधन के 13 साल बाद एक ऐतिहासिक फैसले में उनको बर्खास्त करने के राज्यपाल के आदेश को रद्द कर दिया है। हाईकोर्ट ने दिवंगत जिला न्यायाधीश के बर्खास्तगी आदेश को असंवैधानिक करार दिया है।
जस्टिस मुन्नुरी लक्ष्मण और जस्टिस बिपिन गुप्ता की खंडपीठ ने वर्ष 2010 में पारित सरस्वत की बर्खास्तगी के आदेश को रद्द करते हुए कहा कि उनके खिलाफ की गई अनुशासनात्मक कार्यवाही “प्राकृतिक न्याय के सिद्धांतों” के विपरीत थी और साक्ष्यों के अभाव में आरोप साबित नहीं होते थे।
8 राजस्थान हाईकोर्ट ने राज्य के नेशनल और स्टेट हाइवे पर मौजूद शराब ठेकों को लेकर बड़ा और ऐतिहासिक फैसला सुनाया है.
जस्टिस डॉ. पुष्पेंद्र सिंह भाटी और जस्टिस संजीत पुरोहित की खंडपीठ ने स्पष्ट निर्देश दिए हैं कि हाइवे के 500 मीटर के दायरे में आने वाले सभी शराब ठेकों को हटाया या रिलोकेट किया जाए.
9 राजस्थान हाईकोर्ट की जयपुर पीठ ने एक रिपोर्टेबल फैसले के जरिए नज़ीर कायम करते हुए यह स्पष्ट कर दिया है कि “कोई भी व्यक्ति या संस्था, चाहे वह कितनी ही बड़ी क्यों न हो, कानून और अदालत के आदेशों से ऊपर नहीं है।”
जस्टिस अनूप कुमार ढंड की एकलपीठ ने एक्सिस बैंक लिमिटेड द्वारा दायर आपराधिक याचिका को खारिज करते हुए निचली अदालत के उस आदेश को सही ठहराया, जिसमें बैंक को किसानों की राशि से जुड़ी फिक्स्ड डिपॉजिट की रकम वापस जमा कराने के आदेश दिए गए थे।
10 राजस्थान हाईकोर्ट ने अपने महत्वपूर्ण आदेश में बांसवाड़ा की आदिवासी महिला काली को बड़ी राहत देते हुए कहा है कि उसे अब आगे की सज़ा काटने के लिए जेल नहीं भेजा जाएगा. जस्टिस फरजंद अली और जस्टिस आनंद शर्मा की खंडपीठ ने अब इस मामले में रिपोर्टेबल जजमेंट के जरिए फैसला सुनाते हुए आरोपी आदिवासी महिला को भुगती हुई 2 साल की सजा के आधार पर ही रिहा करने का फैसला सुनाया हैं.
हाईकोर्ट ने अपने फैसले में कहा कि यह विसंगति कोर्ट रजिस्ट्री, ट्रायल कोर्ट, सरकारी अधिकारियों तथा लोक अभियोजक कार्यालय के बीच संचार की कमी का परिणाम हैं.