नई दिल्ली: सुप्रीम कोर्ट में मामलों के कामकाज को लेकर चीफ जस्टिस सूर्यकांत ने कड़ी नाराजगी जताते हुए न्यायिक प्रशासन और रजिस्ट्री की जवाबदेही को लेकर कड़ा रुख अपनाया है।
कोर्ट में लंबित मामलों और न्यायिक प्रक्रिया की पारदर्शिता को लेकर सुप्रीम कोर्ट ने एक अहम टिप्पणी करते हुए कहा है कि यदि किसी मामले की फाइल रजिस्ट्री में गुम होती है और उसकी वजह से सुनवाई प्रभावित होती है, तो जिम्मेदारी तय की जाएगी। कोर्ट ने कहा कि न्याय पाने के लिए आए किसी व्यक्ति का मामला केवल प्रशासनिक लापरवाही की वजह से अटक नहीं सकता।
सुप्रीम कोर्ट ने एक मामले की सुनवाई के दौरान उस शिकायत को गंभीरता से लिया, जिसमें आरोप लगाया गया था कि एक जरूरी याचिका की फाइल रजिस्ट्री में गुम हो गई। इसकी वजह से मामला लंबे समय तक न तो रजिस्टर हुआ और न ही सुनवाई के लिए सूचीबद्ध हो सका।
कोर्ट ने इस मामले में तत्काल लिखित शिकायत देने का निर्देश दिया और कहा कि यदि वास्तव में रजिस्ट्री की वजह से फाइल गुम हुई है तो यह बेहद गंभीर मामला है। कोर्ट ने साफ संकेत दिया कि मामले की जांच होगी और यह देखा जाएगा कि इसके लिए जिम्मेदार कौन है।
चीफ जस्टिस सूर्यकांत और जस्टिस वी. मोहना की पीठ ने कहा कि यदि सुप्रीम कोर्ट की रजिस्ट्री ही जरूरी मामलों की फाइलें संभालने में चूक कर रही है, तो इसे हल्के में नहीं लिया जा सकता। सीजेआई सूर्यकांत ने कहा कि वह केवल मामले को सूचीबद्ध करने का आदेश देकर नहीं रुकेंगे, बल्कि यह भी देखेंगे कि गलती कहां हुई और इसके लिए जिम्मेदार कौन है।
क्या है पूरा मामला?
मामला उस समय सामने आया जब बेंच के सामने सुनवाई के दौरान एडवोकेट शुभी शिवानी जयदीप ने कोर्ट को बताया कि उन्होंने 8 जून को एक अर्जेंट एसएलपी दाखिल की थी। लेकिन इतने समय बीत जाने के बाद भी न तो केस का रजिस्ट्रेशन हुआ और न ही उसे सुनवाई के लिए लिस्ट किया गया।
वकील का कहना था कि इस संबंध में रजिस्ट्रार को लिखित आवेदन भी दिया गया, लेकिन कोई जवाब नहीं मिला। उनका आरोप था कि फाइल रजिस्ट्री में कहीं गुम हो गई है और इसी वजह से मामला आगे नहीं बढ़ पा रहा है।
वकील ने कोर्ट से हस्तक्षेप की मांग करते हुए कहा कि फाइल तलाशने, मामले को दोबारा पंजीकृत करने और जल्द सुनवाई के लिए सूचीबद्ध करने का निर्देश दिया जाए।
सुनवाई के दौरान क्या हुआ?
जैसे ही यह आरोप कोर्ट के सामने रखा गया, चीफ जस्टिस सूर्यकांत ने इसे गंभीरता से लिया। उन्होंने कहा कि यदि वास्तव में रजिस्ट्री की वजह से किसी जरूरी मामले की फाइल गुम हुई है, तो यह साधारण बात नहीं है। ऐसी स्थिति में केवल मामले को सूचीबद्ध करने का आदेश देना पर्याप्त नहीं होगा।
सुनवाई के दौरान चीफ जस्टिस सूर्यकांत ने कहा कि यदि रजिस्ट्री जरूरी मामलों की फाइलें ही संभालकर नहीं रख पा रही है, तो यह चिंता का विषय है। उन्होंने कहा कि ऐसी स्थिति में यह भी देखना होगा कि गलती किस स्तर पर हुई और इसके लिए जिम्मेदार कौन है।
रजिस्ट्री की भूमिका क्यों अहम है?
सुप्रीम कोर्ट में कोई भी मामला दाखिल होने के बाद सबसे पहले रजिस्ट्री के पास जाता है। रजिस्ट्री ही यह जांचती है कि याचिका में सभी जरूरी दस्तावेज मौजूद हैं या नहीं। इसके बाद मामला पंजीकृत होता है और फिर सुनवाई के लिए सूचीबद्ध किया जाता है।
यदि इसी स्तर पर कोई फाइल गुम हो जाए या प्रक्रिया रुक जाए, तो मामला कोर्ट तक पहुंच ही नहीं पाता। इसका सीधा असर उस व्यक्ति पर पड़ता है जो न्याय की उम्मीद लेकर कोर्ट पहुंचा होता है।
यही वजह है कि चीफ जस्टिस ने इस शिकायत को केवल प्रशासनिक समस्या मानने के बजाय न्यायिक प्रक्रिया से जुड़ा गंभीर मुद्दा माना।
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तत्काल शिकायत देने का निर्देश
मामले की गंभीरता को देखते हुए चीफ जस्टिस सूर्यकांत ने याचिकाकर्ता की ओर से पेश वकील को तुरंत लिखित शिकायत देने का निर्देश दिया।
कोर्ट ने वकील को उसी दिन लिखित शिकायत देने का निर्देश दिया ताकि मामले की जांच शुरू की जा सके। चीफ जस्टिस सूर्यकांत ने कहा कि वह खुद मामले को देखेंगे और पता लगाएंगे कि फाइल आखिर कहां और कैसे गुम हुई। यदि किसी स्तर पर लापरवाही हुई है, तो उसे नजरअंदाज नहीं किया जा सकता।
पहले भी रजिस्ट्री के कामकाज पर उठ चुके हैं सवाल
यह पहला मौका नहीं है जब चीफ जस्टिस सूर्यकांत ने रजिस्ट्री के कामकाज पर नाराजगी जताई हो। इससे पहले भी वह कई बार मामलों में होने वाली देरी और गड़बड़ियों पर सवाल उठा चुके हैं।
इसी साल मई में चीफ जस्टिस सूर्यकांत ने रजिस्ट्री के कामकाज पर नाराजगी जताते हुए कहा था कि कुछ अधिकारी खुद को ‘सुपर चीफ जस्टिस’ समझने लगे हैं।
एक दूसरे मामले में भी चीफ जस्टिस सूर्यकांत ने रजिस्ट्री पर सवाल उठाए थे। तब उन्होंने कहा था कि एक जैसे मामलों को अलग-अलग बेंच के सामने लगाने की वजह की जांच होनी चाहिए।
इन मामलों से साफ है कि चीफ जस्टिस सूर्यकांत कोर्ट के कामकाज में होने वाली देरी और गड़बड़ियों को लेकर काफी सख्त रुख रखते हैं।
सुप्रीम कोर्ट पहले भी दे चुका है स्पष्ट संदेश
सुप्रीम कोर्ट पहले भी यह स्पष्ट कर चुका है कि रजिस्ट्री को अपने स्तर पर किसी सूचीबद्ध मामले को हटाने या उसमें बदलाव करने का अधिकार नहीं है।
सुप्रीम कोर्ट ने कहा था कि किसी मामले को लिस्ट में शामिल करने के बाद उसे हटाने का अधिकार सिर्फ संबंधित बेंच या चीफ जस्टिस के पास होता है। रजिस्ट्री अपने स्तर पर ऐसा फैसला नहीं ले सकती।
कोर्ट ने तब भी कहा था कि न्यायिक प्रक्रिया की पवित्रता बनाए रखना जरूरी है और प्रशासनिक स्तर पर ऐसी कोई कार्रवाई नहीं होनी चाहिए जिससे मामले की सुनवाई प्रभावित हो।
सुप्रीम कोर्ट का फैसला
सभी पक्षों को सुनने के बाद सुप्रीम कोर्ट ने याचिकाकर्ता की ओर से पेश वकील को तत्काल लिखित शिकायत देने का निर्देश दिया। कोर्ट ने कहा कि शिकायत उसी दिन उपलब्ध कराई जाए ताकि मामले की जांच की जा सके।
चीफ जस्टिस सूर्यकांत ने कहा कि यदि रजिस्ट्री की ओर से कोई चूक हुई है तो उसकी जांच की जाएगी और यह देखा जाएगा कि इसके लिए जिम्मेदार कौन है। कोर्ट ने संकेत दिया कि वह मामले को व्यक्तिगत रूप से देखेंगे और शिकायत में उठाए गए आरोपों की जांच कराएंगे।
क्यों अहम है यह मामला?
यह मामला केवल एक फाइल गुम होने का नहीं है। यह न्यायिक व्यवस्था में जवाबदेही और प्रशासनिक जिम्मेदारी से जुड़ा मुद्दा है।
देशभर में लाखों लोग कोर्टों में न्याय की उम्मीद लेकर पहुंचते हैं। यदि कोई मामला केवल इसलिए आगे नहीं बढ़ पाता क्योंकि फाइल सही जगह नहीं पहुंची या रिकॉर्ड संभालने में चूक हो गई, तो इसका सीधा असर न्याय प्रक्रिया पर पड़ता है।
सुप्रीम कोर्ट की टिप्पणी इस बात का संकेत है कि न्यायिक संस्थानों के प्रशासनिक ढांचे को भी उतना ही जवाबदेह होना चाहिए जितना न्यायिक प्रक्रिया को माना जाता है। न्यायिक प्रक्रिया में प्रशासनिक लापरवाही को सामान्य बात मानकर नजरअंदाज नहीं किया जा सकता।
कोर्ट ने यह भी संकेत दिया है कि यदि किसी मामले में फाइल, रिकॉर्ड या सूचीबद्ध करने की प्रक्रिया में गड़बड़ी होती है, तो उसकी जवाबदेही तय की जा सकती है। इससे न्यायिक व्यवस्था में लोगों का भरोसा मजबूत होगा और प्रशासनिक स्तर पर जवाबदेही बढ़ेगी।
