बेंगलुरु। नेशनल लॉ स्कूल ऑफ इंडिया यूनिवर्सिटी (NLSIU) के छात्रों और पूर्व छात्रों ने आगामी दीक्षांत समारोह में भारत के चीफ जस्टिस (CJI) सूर्यकांत और बार काउंसिल ऑफ इंडिया (BCI) के चेयरमैन मानन कुमार मिश्रा को आमंत्रित किए जाने पर आपत्ति जताई है।
15 अगस्त को जारी बयान में NLSIU के छात्रों और पूर्व छात्रों ने नेशनल एकेडमी ऑफ लीगल स्टडीज एंड रिसर्च (NALSAR) यूनिवर्सिटी ऑफ लॉ के उन छात्रों के साथ एकजुटता जताई, जिन्होंने अपने दीक्षांत समारोह में CJI को मुख्य अतिथि बनाए जाने का विरोध किया था।
यह बयान ऐसे समय आया है, जब NALSAR के 2026 बैच के छात्रों के वकील के तौर पर नामांकन पर रोक लगाने वाला BCI का आदेश वापस लिया जा चुका है।
NLSIU के छात्रों और पूर्व छात्रों ने इस कार्रवाई पर सवाल उठाते हुए NALSAR के छात्रों और शिक्षकों से BCI की ओर से बिना शर्त माफी मांगने की मांग की है।
NALSAR के छात्रों के समर्थन में बयान जारी
यह घटनाक्रम हैदराबाद के NALSAR यूनिवर्सिटी में हुए विवाद के कुछ ही दिनों बाद सामने आया है।
जारी बयान में NLSIU के छात्रों और पूर्व छात्रों ने कहा कि वे NALSAR यूनिवर्सिटी के उन छात्रों के साथ खड़े हैं, जिन्होंने चीफ जस्टिस को अपने दीक्षांत समारोह में मुख्य अतिथि बनाए जाने पर सवाल उठाए थे।
उन्होंने बार काउंसिल ऑफ इंडिया की ओर से 2026 बैच के छात्रों के वकील के तौर पर नामांकन पर रोक लगाने के अब वापस लिए जा चुके आदेश पर भी आपत्ति जताई है।
छात्रों का कहना है कि कानून की पढ़ाई कर रहे लोगों को बड़े संवैधानिक पदों पर बैठे लोगों या संस्थानों से असहमति जताने की आजादी होनी चाहिए।
ऐसी असहमति की वजह से उनके पढ़ाई या पेशेवर भविष्य पर असर नहीं पड़ना चाहिए।
NLSIU के इस बयान पर 2026 बैच के 165 छात्रों, 409 मौजूदा छात्रों और 128 पूर्व छात्रों के हस्ताक्षर हैं।
छात्रों ने बार काउंसिल ऑफ इंडिया से नालसार के छात्रों और शिक्षकों से बिना शर्त माफी मांगने की भी मांग की।
नालसार विवाद के बाद बढ़ा मामला
पूरा विवाद पहले नालसार विश्वविद्यालय से शुरू हुआ था। वहां 2026 बैच के कुछ छात्रों ने विश्वविद्यालय के दीक्षांत समारोह में CJI सूर्यकांत को मुख्य अतिथि बनाए जाने पर आपत्ति जताई थी।
छात्रों की आपत्ति CJI सूर्यकांत की उन टिप्पणियों से जुड़ी थी, जो जंतर-मंतर पर प्रदर्शन के दौरान कथित पुलिस कार्रवाई से जुड़ी याचिका पर तत्काल सुनवाई की मांग के दौरान सामने आई थीं।
इसके बाद NALSAR के छात्रों की ओर से CJI को दीक्षांत समारोह में बुलाए जाने का विरोध किया गया और विश्वविद्यालय से CJI को बुलाने के फैसले पर दोबारा विचार करने की मांग की थी।
मामला यहीं नहीं रुका और छात्रों की आपत्ति के बाद बार काउंसिल ऑफ इंडिया ने 2026 में नालसार से कानून की पढ़ाई पूरी करने वाले छात्रों के नामांकन पर रोक लगाने का निर्देश जारी कर दिया था।
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NLSIU में भी BCI के सर्कुलर से नाराजगी
BCI ने अपने शुरुआती आदेश में सभी राज्य बार काउंसिलों से कहा था कि NALSAR के 2026 बैच के किसी भी छात्र का वकील के तौर पर नामांकन अगले आदेश तक न किया जाए।
BCI ने NALSAR से उन छात्रों की जानकारी भी मांगी थी, जो CJI को दीक्षांत समारोह में मुख्य अतिथि बनाए जाने के खिलाफ शुरू किए गए अभियान में शामिल थे।
इस आदेश के सामने आने के बाद विवाद और बढ़ गया।
हालांकि बाद में BCI ने अपना फैसला वापस लेते हुए NALSAR के 2026 बैच के छात्रों के नामांकन पर रोक हटाने का फैसला किया।
इसके साथ ही पूरे मामले की कार्रवाई भी बंद कर दी गई।
बाद में BCI चेयरमैन मनन कुमार मिश्रा ने छात्रों से माफी मांगते हुए कहा कि अगर उनके शब्दों या कार्रवाई से छात्रों की भावनाएं आहत हुई हैं तो उन्हें इसका खेद है।
इसी पूरे घटनाक्रम के बाद अब NLSIU के छात्रों और पूर्व छात्रों ने अपने विश्वविद्यालय के दीक्षांत समारोह में CJI सूर्यकांत और BCI चेयरमैन मनन कुमार मिश्रा को आमंत्रित किए जाने पर आपत्ति जताई है।
अब NLSIU में भी विरोध
NALSAR के घटनाक्रम के बाद अब NLSIU के छात्रों और पूर्व छात्रों ने भी अपनी बात रखी है।
उन्होंने NALSAR के छात्रों के साथ पूरी तरह एकजुटता जताते हुए BCI की कार्रवाई पर आपत्ति जताई है।
उनका कहना है कि NALSAR के छात्रों ने अपनी असहमति खुलकर रखी, लेकिन उसके बाद BCI की ओर से हुई कार्रवाई ने मामले को और गंभीर बना दिया।
उन्होंने BCI से NALSAR के छात्रों और शिक्षकों से बिना शर्त माफी मांगने की मांग की।
NLSIU के छात्रों ने यह सवाल भी उठाया कि BCI चेयरमैन की ओर से जारी किए गए विवादित आदेश में BCI के आधिकारिक लेटरहेड का इस्तेमाल कैसे हुआ।
छात्रों का कहना है कि विश्वविद्यालय सिर्फ डिग्री हासिल करने की जगह नहीं है।
छात्रों को अपने विचार रखने और किसी फैसले या संस्था से असहमति जताने की आजादी भी होनी चाहिए।
CJI और BCI चेयरमैन को लेकर आपत्ति
NLSIU के छात्रों और पूर्व छात्रों ने अपने बयान में बार काउंसिल चेयरमैन मनन कुमार मिश्रा के दीक्षांत समारोह में शामिल होने पर आपत्ति जताई है।
इसके साथ ही उन्होंने नालसार के छात्रों की उस मांग के साथ भी समर्थन जताया है, जिसमें CJI को मुख्य अतिथि बनाए जाने के फैसले पर दोबारा विचार करने की बात कही गई थी।
NLSIU के मामले में छात्रों ने अपने विश्वविद्यालय के दीक्षांत समारोह में CJI के शामिल होने पर भी असहमति जताई है।
यानी यहां विरोध सिर्फ बार काउंसिल चेयरमैन तक सीमित नहीं है, बल्कि चीफ जस्टिस के प्रस्तावित शामिल होने को लेकर भी छात्रों और पूर्व छात्रों ने विरोध किया।
CJI ने भी छात्रों के विरोध के अधिकार पर कही थी बात
हालांकि, चीफ जस्टिस सूर्यकांत ने 14 अगस्त को नालसार के मामले में यह साफ किया था कि छात्रों को विरोध करने का अधिकार है।
CJI ने BCI की कार्रवाई सवाल उठाते हुए कहा था कि यह छात्रों और उनके बीच का मामला है।
इसके बाद बार काउंसिल ने नालसर के छात्रों के नामांकन पर रोक लगाने वाला आदेश वापस ले लिया।
सुप्रीम कोर्ट ने भी बार काउंसिल से उसके जारी किए गए पत्रों पर जवाब मांगा और नालसार के छात्रों और शिक्षकों के खिलाफ दंडात्मक कार्रवाई नहीं करने को कहा था।
NLSIU का बार काउंसिल से पुराना जुड़ाव
NLSIU और बार काउंसिल ऑफ इंडिया के बीच संस्थागत संबंध भी पुराने हैं।
विश्वविद्यालय के संचालन से जुड़े ढांचे में भारत के मुख्य न्यायाधीश और बार काउंसिल चेयरमैन की भूमिका रही है।
NLSIU के 2025 के दीक्षांत समारोह में उस समय सुप्रीम कोर्ट के जज रहे सूर्यकांत ने समारोह की अध्यक्षता की थी। वहीं मनन कुमार मिश्रा ने स्वागत भाषण दिया था।
यानी इस बार का विवाद ऐसे संस्थान में सामने आया है, जहां दोनों का पहले भी दीक्षांत समारोह से जुड़ाव रहा है।
इस पूरे घटनाक्रम में फिलहाल दो प्रमुख कानून संस्थानों के छात्र और पूर्व छात्र सामने आए हैं।
पहले NALSAR के छात्रों की आपत्ति के बाद बार काउंसिल की कार्रवाई और फिर उसका वापस लिया जाना चर्चा में रहा।
अब NLSIU के छात्रों और पूर्व छात्रों ने उसी घटनाक्रम के बाद अपने दीक्षांत समारोह को लेकर आपत्ति दर्ज कराई है।