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Rajasthan Budget 2026: अदालतों के आदेशों की गूंज बजट में, शिक्षा से लेकर भर्ती और सड़क सुरक्षा तक बड़े प्रावधान

Court Rulings Shape Rajasthan Budget 2026: Major Allocations for Schools, Road Safety, Mental Health and Aravalli Protection
हाईकोर्ट-सुप्रीम कोर्ट की सख्त टिप्पणियों के बाद स्कूल इन्फ्रास्ट्रक्चर, मानसिक स्वास्थ्य सेवाएं, नई टेस्टिंग एजेंसी, अरावली संरक्षण और न्यायालयों के ढांचे को मजबूत करने पर सरकार के बड़े वित्तीय प्रावधान

जयपुर। राजस्थान सरकार द्वारा बुधवार को पेश किए गए राज्य बजट में स्पष्ट रूप से अदालतों के हालिया आदेशों और टिप्पणियों का प्रभाव देखने को मिला।

बजट में जहां एक ओर जर्जर हो चुके सरकारी स्कूलों के भवनों और बुनियादी सुविधाओं के सुधार के लिए बड़े वित्तीय प्रावधान किए गए हैं, वहीं अदालतों द्वारा उठाए गए शिक्षा, भर्ती परीक्षाओं की पारदर्शिता, मानसिक स्वास्थ्य और न्यायालयों के इन्फ्रास्ट्रक्चर से जुड़े मुद्दों पर भी विशेष ध्यान दिया गया है।

बजट में हुए प्रावधानों को देखते हुए अधिवक्ता पूनमचंद भंडारी कहते हैं कि अदालतों के फैसलों का प्रभाव बजट में होना ये आम जनता के लिए बेहद लाभदायक हैं.

POONAM CHAND BHANDARI, Advocate Rajasthan High court Jaipur

बुधवार को पेश किए गए राजस्थान बजट 2026-27 में कई महत्वपूर्ण प्रावधान ऐसे सामने आए, जिनमें हाल के समय में देश और प्रदेंश की अदालतों द्वारा दिए गए आदेशों और कड़ी टिप्पणियों का स्पष्ट प्रभाव दिखाई देता है।

पिछले महीनों में राजस्थान हाईकोर्ट और सुप्रीम कोर्ट ने जर्जर सरकारी स्कूल भवनों, पेपर लीक से जुड़ी भर्ती परीक्षाओं, बढ़ते आत्महत्या मामलों, मानसिक रोगियों की स्थिति, सड़क दुर्घटनाओं तथा अरावली क्षेत्र में अवैध खनन जैसे मामलों पर सरकार को प्रभावी कदम उठाने के निर्देश दिए थे।

स्कूलों की जर्जर हालत और नए भवन

पिछले कुछ समय में राजस्थान हाईकोर्ट ने राज्य के कई सरकारी स्कूलों की खराब स्थिति को लेकर सरकार को बार-बार फटकार लगाई थी।

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अदालत ने कई मामलों में स्कूल भवनों की मरम्मत, सुरक्षित कक्षाओं की व्यवस्था, पेयजल और शौचालय जैसी बुनियादी सुविधाएं उपलब्ध कराने के निर्देश दिए थे।

इन टिप्पणियों के बाद सरकार ने बजट में स्कूलों के बुनियादी ढांचे के विकास के लिए लगभग 1,000 करोड़ रुपये का प्रावधान किया है। इससे राज्य के हजारों स्कूलों में भवन मरम्मत, नए कक्ष निर्माण और आवश्यक सुविधाओं के विस्तार की उम्मीद बढ़ गई है।

आत्महत्या के बढ़ते मामले और मानसिक रोगी

इसी तरह शिक्षा संस्थानों, विशेषकर कोचिंग संस्थानों में बढ़ते आत्महत्या के मामलों को लेकर भी अदालतों ने कई बार गंभीर चिंता जताई थी।

हाईकोर्ट और अन्य न्यायिक संस्थाओं ने सरकार को मानसिक स्वास्थ्य सेवाओं को मजबूत करने और विद्यार्थियों के लिए काउंसलिंग सुविधाएं बढ़ाने के निर्देश दिए थे।

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बजट में इन निर्देशों को ध्यान में रखते हुए मानसिक स्वास्थ्य सेवाओं के विस्तार, अवसाद और तनाव से जूझ रहे लोगों के लिए विशेष सहायता कार्यक्रम तथा परामर्श केंद्रों की स्थापना के लिए अलग से प्रावधान किए गए हैं।

सरकार ने मानसिक रूप से बीमार और कमजोर वर्गों के लिए उपचार और पुनर्वास सेवाओं को सुदृढ़ करने की भी घोषणा की है।

मानसिक रोगियों

राज्य के कई जिलों में मानसिक रोगियों को जंजीरों से बांधकर रखने की घटनाएं सामने आने के बाद यह मुद्दा राष्ट्रीय स्तर पर चर्चा में रहा था।

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इस मामले में सुप्रीम कोर्ट, हाईकोर्ट, राज्य मानवाधिकार आयोग और राज्य विधिक सेवा प्राधिकरण तक ने रिपोर्ट मांगी थी। इन घटनाओं ने मानसिक स्वास्थ्य सेवाओं की कमजोर स्थिति को उजागर किया था।

अब बजट में मानसिक स्वास्थ्य संस्थानों के उन्नयन, नए उपचार केंद्रों की स्थापना और जागरूकता कार्यक्रमों के लिए महत्वपूर्ण वित्तीय प्रावधान किए गए हैं, जिससे इस दिशा में सुधार की उम्मीद जताई जा रही है।

राजस्थान टेस्टिंग एजेंसी का गठन

भर्ती परीक्षाओं में अनियमितताओं और पेपर लीक के मामलों को लेकर भी पिछले एक वर्ष में राज्य सरकार को अदालतों से कई बार फटकार का सामना करना पड़ा।

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विशेष रूप से एसआई भर्ती परीक्षा विवाद ने सरकार को कठिन स्थिति में डाल दिया था। विभिन्न भर्ती परीक्षाओं में पारदर्शिता और विश्वसनीयता सुनिश्चित करने के लिए अदालतों ने सख्त टिप्पणियां करते हुए सुधारात्मक कदम उठाने की आवश्यकता बताई थी।

इन परिस्थितियों को ध्यान में रखते हुए सरकार ने बजट में नई टेस्टिंग एजेंसी गठित करने की घोषणा की है।

सरकार ने कहा है कि राष्ट्रीय परीक्षण एजेंसी (NTA) की तर्ज पर राजस्थान टेस्टिंग एजेंसी का गठन किया जाएगा, जो राज्य में होने वाली विभिन्न प्रतियोगी परीक्षाओं का आयोजन करेगी।

HARENDRA NEEL, Advocate Rajasthan High court

इस एजेंसी का उद्देश्य परीक्षा प्रक्रिया को पारदर्शी, सुरक्षित और तकनीकी रूप से मजबूत बनाना होगा, ताकि पेपर लीक और अन्य अनियमितताओं पर प्रभावी नियंत्रण लगाया जा सके।

इसके लिए आधुनिक तकनीकी व्यवस्था और निगरानी प्रणाली विकसित करने का भी प्रस्ताव रखा गया है।

सड़क सुरक्षा पर विशेष कदम

राज्य में बढ़ते सड़क हादसों को लेकर राजस्थान हाईकोर्ट और सुप्रीम कोर्ट दोनों ने कई मामलों में प्रसंज्ञान लेते हुए सरकार को प्रभावी कदम उठाने के निर्देश दिए थे।

पिछले वर्ष हुए बड़े सड़क हादसों को लेकर विपक्ष ने भी सरकार पर गंभीर सवाल उठाए थे।

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इस बार के बजट में सड़क हादसों को कम करने के लिए राज्यभर में 2,000 सीसीटीवी कैमरे स्थापित करने की घोषणा की गई है, जिससे ट्रैफिक नियमों की निगरानी मजबूत हो सकेगी।

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अरावली संरक्षण के लिए 130 करोड़ रुपये

अरावली क्षेत्र में अवैध खनन और पर्यावरण क्षति को लेकर सुप्रीम कोर्ट द्वारा पूर्व में खनन पर रोक लगाने और व्यापक स्तर पर विरोध के बाद सरकार ने इस दिशा में भी बड़ा कदम उठाया है।

बजट में अरावली पर्वतमाला के संरक्षण के लिए 130 करोड़ रुपये खर्च करने की घोषणा की गई है।

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इसके तहत अरावली के लगभग 4,000 हेक्टेयर क्षेत्र में पक्की दीवार निर्माण, जलसंरचना विकास और व्यापक स्तर पर बीजारोपण किया जाएगा। साथ ही

अवैध खनन के खिलाफ प्रभावी कार्रवाई करने की भी बात कही गई है।

खनन मामलों और भूमि प्रबंधन से जुड़े प्रावधान

सरकार के भूमि प्रबंधन से जुड़े नए प्रावधानों के तहत वन भूमि के बदले वैकल्पिक भूमि उपलब्ध कराने के लिए 1,000 करोड़ रुपये का लैंड बैंक बनाने की घोषणा की गई है, जिससे विभिन्न परियोजनाओं के लिए भूमि उपलब्ध कराने की प्रक्रिया तेज होने की संभावना जताई जा रही है।

ऐसे ही एक मामले में जहां राज्य और केन्द्र ने वन भूमि पर आवंटित कि गयी माइंस को हाल ही में कोर्ट से मंजूरी मिली हैं.

सीकर जिले में लगभग 600 बीघा भूमि पर खनन से जुड़े एक मामले में वर्षों से न्यायालय में लंबित विवाद के बाद अब मामला सुप्रीम कोर्ट में विचाराधीन है।

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न्यायालयों के इन्फ्रास्ट्रक्चर को भी मिलेगा बल

बजट में न्यायालयों के इन्फ्रास्ट्रक्चर को मजबूत करने के लिए भी प्रावधान किए गए हैं। अदालतों के भवनों के विस्तार, नई अदालतों की स्थापना और ई-कोर्ट सुविधाओं के विस्तार पर जोर दिया गया है, ताकि बढ़ते मामलों के बोझ को कम किया जा सके और न्यायिक प्रक्रिया को अधिक सुगम बनाया जा सके।

गौरतलब हैं कि राज्य में न्यायिक इन्फ्रास्ट्रक्चर को लेकर राजस्थान हाईकोर्ट जोधपुर मुख्यपीठ ने अलग अलग बार ​एसोसिएशन की याचिकाओं पर केन्द्र और राज्य सरकार को सख्त आदेश दे चुका हैं.

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बढ़ते साइबर अपराधों और “डिजिटल अरेस्ट” 150 करोड़ रुपये

राजस्थान में बढ़ते साइबर अपराधों और “डिजिटल अरेस्ट” जैसी घटनाओं पर रोक लगाने के लिए राज्य सरकार ने बड़ा कदम उठाने की तैयारी की है।

नई व्यवस्था के तहत AI आधारित साइबर अपराध विश्लेषण प्रणाली विकसित की जाएगी और राष्ट्रीय साइबर हेल्पलाइन 1930 को और अधिक प्रभावी बनाया जाएगा। इस परियोजना पर लगभग 100 करोड़ रुपये खर्च किए जाएंगे।

गौरतलब हैं ​राज्य में बढते साईबर अपराध के लिए पिछले 6 माह में ही राजस्थान हाईकोर्ट जोधपुर और जयपुर की अलग अलग अदालतों ने आधा दर्जन से अधिक मामलों में सरकार को आदेश दिए.

कई बार अदालतें साईबर अपराध से लड़ने के लिए आवश्यक सिस्टम नहीं होने पर सरकार को फटकार लगा चुका हैं.

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सरकार प्रदेश में राजस्थान साइबर क्राइम कंट्रोल सेंटर (R4C) की स्थापना करेगी, जिसका उद्देश्य साइबर अपराधों की निगरानी, विश्लेषण और त्वरित कार्रवाई सुनिश्चित करना होगा।

इसके साथ ही वर्ष 2030 तक सभी पुलिस जिलों में साइबर पुलिस स्टेशन स्थापित करने की योजना है, जबकि जयपुर शहर और ग्रामीण क्षेत्रों में अतिरिक्त साइबर थाने खोले जाएंगे। SOG, एंटी-नारकोटिक्स और एंटी-गैंगस्टर टास्क फोर्स के लिए नए कार्यालय भी बनाए जाएंगे।

राज्य के प्रमुख शहरों में साइबर फॉरेंसिक डिवीजन स्थापित कर जांच प्रक्रिया को और मजबूत किया जाएगा, जिससे साइबर अपराधों पर प्रभावी नियंत्रण संभव हो सकेगा।

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