जयपुर। वर्ष 2025 राजस्थान हाईकोर्ट के न्यायिक इतिहास में केवल फैसलों का वर्ष नहीं, बल्कि न्याय की दिशा तय करने वाला कालखंड साबित हुआ।
इस दौरान राजस्थान हाईकोर्ट ने उन मामलों में निर्णायक हस्तक्षेप किया, जहां व्यवस्था पर सवाल थे, पारदर्शिता दांव पर थी और आम नागरिकों के अधिकार प्रभावित हो रहे थे।
चाहे भर्ती घोटालों पर सख्त रुख हो, प्रशासनिक मनमानी पर लगाम या संवैधानिक मूल्यों की पुनर्स्थापना—राजस्थान हाईकोर्ट के फैसलों ने स्पष्ट संदेश दिया कि कानून से ऊपर कोई नहीं।
वर्ष 2025 में राजस्थान हाईकोर्ट के ऐतिहासिक और महत्वपूर्ण फैसले श्रृंखला के पार्ट–6 में हम ऐसे ही फैसलों को प्रस्तुत कर रहे हैं, जिन्होंने न सिर्फ न्यायिक मिसालें स्थापित कीं, बल्कि भविष्य की नीतियों और प्रक्रियाओं की दिशा भी तय की।
पार्ट–6 | राजस्थान हाईकोर्ट के ऐतिहासिक और महत्वपूर्ण फैसले
1 राजस्थान हाईकोर्ट ने 28 अगस्त 2025 को फैसला सुनाते हुए पुलिस उप निरीक्षक (SI) भर्ती-2021 को पूरी तरह रद्द करने का ऐतिहासिक फैसला सुनाया। जस्टिस समीर जैन की एकलपीठ ने 202 पेज के विस्तृत आदेश में कहा कि यह भर्ती व्यापक पेपर लीक और संस्थागत भ्रष्टाचार से ग्रस्त रही। कोर्ट ने माना कि भर्ती का प्रश्नपत्र पूरे प्रदेश में फैल गया था और ब्लूटूथ गैंग तक भी पहुंचा।
अदालत ने आरपीएससी के तत्कालीन अध्यक्ष सहित 6 सदस्यों की भूमिका को गंभीर बताते हुए कहा कि “घर के भेदियों ने ही लंका ढहाई।” कोर्ट ने निर्देश दिए कि एसआई भर्ती-2021 के 859 पदों को वर्ष 2025 की नई भर्ती में जोड़ा जाए और पुराने सभी अभ्यर्थियों को दोबारा अवसर दिया जाए।
2 राजस्थान हाईकोर्ट ने एक महत्वपूर्ण फैसले में कहा है कि यदि सेवानिवृत्त कर्मचारी को समय पर उसकी सेवानिवृत्ति संबंधी लाभ नहीं दिए जाते हैं, तो विभाग को उस पर निर्धारित दर से ब्याज चुकाना होगा.
जस्टिस महेन्द्र कुमार गोयल की एकलपीठ ने यह आदेश आदेश सेवानिवृति कर्मचारी लक्ष्मीनारायण माथुर की ओर से दायर याचिका पर सुनवाई करते हुए दिए हैं.
3 राजस्थान हाईकोर्ट ने एक महत्वपूर्ण आदेश देते हुए ऋण वसूली अधिकरण DRT के उस आदेश् को रद्द कर दिया हैं, जिसमें याचिकाकर्ताओं की सिक्योरिटाइजेशन एप्लिकेशन SA केवल इस आधार पर खारिज कर दी गई थी कि सभी उधारकर्ताओं ने आवेदन और शपथपत्र पर हस्ताक्षर नहीं किए थे.
हाईकोर्ट ने अपने आदेश मे यह स्पष्ट किया कि यह अनिवार्य नहीं है कि प्रत्येक आवेदक को आवेदन और शपथपत्र पर हस्ताक्षर करना ही होगा.
4 राजस्थान हाईकोर्ट ने एक महत्वपूर्ण आदेश में दिव्यांग अभ्यर्थी को रविवार, 21 सितंबर 2025 को होने वाली परीक्षा में स्क्राइब यानी सहायक लेखक की सुविधा उपलब्ध कराने के आदेश दिए हैं।
जस्टिस मनीष शर्मा की एकलपीठ ने अपने आदेश में कहा कि याचिकाकर्ता को परीक्षा में शामिल होने से रोका नहीं जा सकता और उन्हें स्क्राइब की सुविधा उपलब्ध कराना संबंधित विभागों की जिम्मेदारी है.
5 राजस्थान हाईकोर्ट ने एक महत्वपूर्ण आदेश में यह स्पष्ट किया है कि किसी भी समय-सीमा से बाहर दायर अपील को तब तक सुना ही नहीं जा सकता जब तक उसकी देरी विधिवत तरीके से माफ न की जाए।
जस्टिस अनूप कुमार धांध की अदालत ने बोर्ड ऑफ रेवेन्यू द्वारा 44 साल की देरी से दायर की गई अपील को स्वीकार करने और 44 साल पुरानी डिक्री को निरस्त करने पर हैरानी भी जताई।
6 राजस्थान हाईकोर्ट ने फार्मासिस्ट भर्ती-2023 में बोनस अंक देने से जुड़े एक मामले में अहम फैसला सुनाते हुए कहा हैं कि बोनस अंक नियमों के तहत एक नीतिगत लाभ हैं, कोई अधिकार नहीं.
राजस्थान हाईकोर्ट जयपुर ने उस रिट याचिका को खारिज कर दिया, जिसमें उन्होंने कोविड हेल्थ असिस्टेंट (CHA) के रूप में कार्यकाल के आधार पर फार्मासिस्ट भर्ती में बोनस अंक देने से इनकार किए जाने को चुनौती दी थी.
जस्टिस आनंद शर्मा ने कोविड के दौरान नियुक्त हुए कोविड हेल्थ असिस्टेंट के अनुभव को फार्मासिस्ट के समान मानने से इंकार करते हुए याचिकाओं को खारिज करने के आदेश दिए हैं.
7 राजस्थान हाईकोर्ट ने एक महत्वपूर्ण आदेश में स्टोर-मुंशी पद पर वर्षों से कार्यरत दो कर्मचारियों को सेमी-परमानेंट दर्जा देने का आदेश दिया है। हाईकोर्ट ने राज्य सरकार द्वारा जारी 12 मई 2016 के आदेशों को अवैध, मनमाना और असंवैधानिक ठहराते हुए निरस्त कर दिया।
जस्टिस आनंद शर्मा की एकलपीठ ने कहा कि सेमी-परमानेंट दर्जा पाने का अधिकार किसी बाद के प्रशासनिक परिवर्तनों पर निर्भर नहीं करता, बल्कि यह निरंतर रूप से निभाई गई जिम्मेदारियों की वास्तविकता से उत्पन्न होता है।
8 राजस्थान हाईकोर्ट ने यह स्पष्ट किया हैं कि किसी भर्ती के लिए आवेदन प्रक्रिया के दौरान, आवेदन पूर्ण होने के बाद सुधार के लिए दिए गए समय का उपयोग पात्रता शर्तों को बदलने के लिए नहीं किया जा सकता.इसी आधार पर हाईकोर्ट ने जूनियर इंस्ट्रक्टर (इलेक्ट्रॉनिक्स मैकेनिक) पद के लिए आवेदन असंगत होने के कारण दाखिल इंट्रा कोर्ट अपील को खारिज कर दिया।
जस्टिस अवनीश झींगन और जस्टिस बी. एस. संधू की खंडपीठ ने सुनील जांगिड़ की ओर से दायर अपील को खारिज करते हुए यह आदेश दिया।
9 राजस्थान हाईकोर्ट ने एक महत्वपूर्ण फैसले में स्पष्ट किया है कि राज्य का भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो (ACB) केंद्रीय सरकारी कर्मचारियों के विरुद्ध भी भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम के तहत आपराधिक मामले दर्ज कर सकता है, यदि अपराध की उत्पत्ति राजस्थान की सीमा के भीतर हुई हो.
जस्टिस सुदेश बंसल की एकलपीठ ने रिपोर्टेबल जजमेंट के जरिए दिए अपने फैसले में कहा कि ACB को ऐसे मामलो में जांच पूर्ण कर सक्षम न्यायालय में चार्जशीट दाखिल करने तक सभी कार्यवाही करने का पूरा अधिकार है.
10 Rajasthan Highcourt ने एक महत्वपूर्ण फैसले में कानूनी व्याख्या स्पष्ट करते हुए कहा है कि भारतीय सेना, नौसेना या वायुसेना के जवानों को भेजे जाने वाले समन (Summons) की सेवा व्हाट्सएप मैसेज के माध्यम से करना पर्याप्त नहीं माना जा सकता। Rajasthan Highcourt ने कहा कि ऐसे मामलों में कानूनी प्रक्रिया के तहत समन संबंधित सैनिक के कमांडिंग अफसर के माध्यम से ही भेजा जाना अनिवार्य है।
जस्टिस अनूप कुमार ढंड की एकलपीठ ने यह आदेश सेना के जवान दीवान सिंह की ओर से दायर याचिका पर दिए हैं।