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राजस्थान हाईकोर्ट वीकली डाइजेस्ट तीसरा सप्ताह -2026 | सरल हिंदी में

Rajasthan High Court Weekly Digest 2026 | Key Judgments on Rights, Governance & Law

जयपुर/जोधपुर राजस्थान हाईकोर्ट का वर्ष 2026 का तीसरा सप्ताह केवल फैसलों की संख्या के कारण नहीं, बल्कि उनके संवैधानिक महत्व, सामाजिक प्रभाव और प्रशासनिक दूरगामी परिणामों के कारण ऐतिहासिक बन गया।

इस सप्ताह दिए गए निर्णयों ने आम नागरिकों के अधिकारों की रक्षा से लेकर सरकारी तंत्र की जवाबदेही तय करने तक, और सेवा कानून से लेकर आपराधिक न्याय, शिक्षा, पर्यावरण संरक्षण व वरिष्ठ नागरिकों के हितों तक—कई महत्वपूर्ण क्षेत्रों को सीधे प्रभावित किया है।

यह वीकली डाइजेस्ट उन फैसलों का संक्षिप्त लेकिन सारगर्भित विश्लेषण प्रस्तुत करता है, जो अधिवक्ताओं, न्यायिक अधिकारियों, लॉ स्टूडेंट्स, सरकारी विभागों और नीति-निर्माताओं के लिए न केवल मार्गदर्शक हैं, बल्कि कानून के शासन (Rule of Law) को मजबूत करने की दिशा में मील का पत्थर भी साबित होते हैं।

वीकली डाइजेस्ट तीसरा सप्ताह -2026

1 पुलिस बिना मजिस्ट्रेट आदेश के बैंक खाता फ्रीज नहीं कर सकती

राजस्थान हाईकोर्ट ने एक महत्वपूर्ण फैसले में आदेश दिया हैं कि केवल संदेह के आधार पर किसी व्यक्ति का पूरा बैंक खाता फ्रीज करना न तो कानूनी है और न ही संविधान सम्मत। राजस्थान हाईकोर्ट ने राजस्थान पुलिस को आदेश दिया हैें कि अब ऐसे मामले में खाता ​फ्रीज करने के लिए मजिस्ट्रेट के आदेश जरूरी हैं.

2 अवैध बर्खास्तगी का लाभ सरकार को नहीं, कर्मचारी को मिलेगा

राजस्थान हाईकोर्ट जयपुर पीठ ने सेवा कानून से जुड़े एक महत्वपूर्ण फैसले में कहा है कि अवैध रूप से सेवा से हटाए गए कर्मचारी को उसके अधिकारों से वंचित नहीं किया जा सकता और ऐसी अवैधता का लाभ राज्य को नहीं दिया जा सकता।

3 हाईकोर्ट विभागीय जांच में साक्ष्यों का पुनर्मूल्यांकन नहीं कर सकता

राजस्थान हाईकोर्ट की जयपुर पीठ ने एक महत्वपूर्ण सेवा कानून से जुड़े मामले में बड़ा फैसला सुनाते हुए स्पष्ट किया कि विभागीय जांच में यदि प्रक्रिया का पालन किया गया हो, पर्याप्त साक्ष्य मौजूद हों और दंड ‘अत्यधिक व चौंकाने वाला’ न हो, तो अनुच्छेद 226 व 227 के तहत न्यायिक समीक्षा की सीमाओं में हस्तक्षेप नहीं किया जा सकता।

4 नाता विवाह को भी मान्यता, दूसरी पत्नी को मिलेगी पारिवारिक पेंशन

राजस्थान हाईकोर्ट की जयपुर पीठ ने एक महत्वपूर्ण फैसले में स्पष्ट किया है कि यदि कोई महिला वैधानिक रूप से मृतक सरकारी कर्मचारी की पत्नी है, भले ही वह दूसरी पत्नी ही क्यों न हो, तो उसे पारिवारिक पेंशन से वंचित नहीं किया जा सकता।

5 स्कूल औद्योगिक कानून से बाहर नहीं

राजस्थान हाईकोर्ट की जयपुर पीठ ने श्रम अधिकारों से जुड़े एक मामले में महत्वपूर्ण और रिपोर्टेबल जजमेंट के जरिए फैसला सुनाते हुए स्पष्ट किया है कि वर्षों तक कर्मचारियों से स्थायी और नियमित कार्य लेकर उन्हें अस्थायी या दैनिक वेतनभोगी बनाए रखना न केवल अन्यायपूर्ण है, बल्कि यह संविधान के अनुच्छेद 14, 16 और 21 का उल्लंघन भी है।

हाईकोर्ट ने अपने फैसले में स्पष्ट किया कि स्कूल को औद्योगिक कानूनों से बाहर नहीं रखा जा सकता, क्योंकि विद्यालय केवल शिक्षा का केंद्र नहीं, बल्कि एक संगठित संस्थान है, जहाँ रसोई, सफाई और अन्य सेवाओं के माध्यम से श्रमिकों से निरंतर श्रम लिया जाता है।

6 आरोपी को अपराधी की तरह सार्वजनिक रूप से अपमानित करना असंवैधानिक

राजस्थान हाईकोर्ट ने पुलिस द्वारा गिरफ्तार व्यक्तियों को थाने के बाहर बैठाकर उनके फोटो खींचने, उन्हें मीडिया व सोशल मीडिया में प्रसारित करने और कथित रूप से अपमानजनक परिस्थितियों में पेश करने और आरोपी को अपराधी की तरह सार्वजनिक रूप से अपमानित करने को न केवल असंवैधानिक बताया, बल्कि संविधान के अनुच्छेद 21 के अंतर्गत प्रदत्त जीवन और गरिमा के अधिकार का सीधा उल्लंघन करार दिया है।

7 अनुशासनात्मक आदेशों में केवल ‘विचार किया गया’ लिखना पर्याप्त नहीं

राजस्थान हाईकोर्ट ने सरकारी कर्मचारियों के खिलाफ अनुशासनात्मक कार्रवाई के मामलों में एक महत्वपूर्ण फैसला सुनाते हुए स्पष्ट किया है कि किसी भी कार्मिक के खिलाफ जारी किए गए अनुशासनात्मक और अपीलीय आदेशों में केवल “विचार किया गया” शब्द लिख देना पर्याप्त नहीं माना जाएगा।

8 फेसलेस असेसमेंट व्यवस्था केवल औपचारिकता नहीं बल्कि अनिवार्य कानूनी प्रक्रिया

राजस्थान हाईकोर्ट ने फेसलेस असेसमेंट व्यवस्था को केवल औपचारिकता नहीं बल्कि अनिवार्य कानूनी प्रक्रिया बताते हुए आयकर विभाग द्वारा जारी किए गए पुनर्मूल्यांकन (री-असेसमेंट) नोटिस को अवैध ठहराते हुए एक महत्वपूर्ण फैसला सुनाया है।

9 अनुबंध की शर्तों से मुकर नहीं सकता उधारकर्ता

राजस्थान हाईकोर्ट ने एक अहम फैसले में साफ किया है कि यदि कोई एमएसएमई (सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्यम) बैंक से ऋण लेते समय किसी शर्त को स्वीकार करता है, तो बाद में उस शर्त को केवल एमएसएमई नियमों का हवाला देकर गलत नहीं ठहराया जा सकता।

10 कैदी भी इंसान, संविधान उन्हें भी गरिमापूर्ण जीवन का अधिकार देता हैं

जस्टिस अनूप कुमार ढंड ने अपने रिपोर्टेबल फैसले में स्पष्ट किया कि कैदी भी इंसान हैं और संविधान उन्हें गरिमापूर्ण जीवन का अधिकार देता है। राज्य की जेलों में बंद कैदियों की बुनियादी मानवीय जरूरतों—विशेषकर पीने और कपड़े धोने के लिए पर्याप्त पानी, स्वच्छता, स्वास्थ्य और व्यक्तिगत गरिमा-पर गंभीर चिंता जताते हुए राज्य सरकार की व्यवस्थाओं को अपर्याप्त करार दिया है।

11 ‘मुबारात’ से हुआ तलाक पूरी तरह वैध

राजस्थान हाईकोर्ट ने मुस्लिम पर्सनल लॉ से जुड़े एक महत्वपूर्ण मामले में बड़ा और ऐतिहासिक फैसला सुनाते हुए स्पष्ट किया है कि यदि मुस्लिम पति-पत्नी आपसी सहमति से ‘मुबारात’ के जरिए विवाह विच्छेद कर चुके हैं, तो फैमिली कोर्ट का दायित्व है कि वह इसकी वैधता की जांच कर वैवाहिक स्थिति को औपचारिक रूप से घोषित करे।

12 पुलिस में बयान के आधार पर कर्मचारी की 100% पेंशन जब्त करना अवैध

राजस्थान हाईकोर्ट ने स्पष्ट कहा कि केवल पुलिस जांच के दौरान धारा 161 सीआरपीसी के तहत दर्ज बयान के आधार पर, बिना गवाह की पेशी और जिरह का अवसर दिए, विभागीय सजा देना प्राकृतिक न्याय के सिद्धांतों का उल्लंघन है।

13 बाल विवाह का हवाला देकर विधवा आरक्षण से वंचित करना गलत

राराजस्थान हाईकोर्ट ने स्पष्ट किया है कि विवाह के समय आयु कम होने के आधार पर किसी महिला को विधवा आरक्षण से वंचित नहीं किया जा सकता, यदि उसका विवाह कभी चुनौती नहीं दिया गया हो और वह कानूनन वैध माना जाता हो।

14 हाईवे पर 75 मीटर के भीतर बने सभी अवैध निर्माण हटाए

हाईकोर्ट ने राज्य में राष्ट्रीय राजमार्ग के मध्य बिंदु से 75 मीटर के भीतर किसी भी प्रकार का निर्माण पूरी तरह अवैध बताते हुए ऐसे सभी निर्माणों को हर हाल में 6 फरवरी तक हटाने के आदेश दिए हैं।

15 ट्रस्ट के विरुद्ध आदेश को व्यक्तिगत हैसियत में चुनौती नहीं दे सकता

राजस्थान हाईकोर्ट ने सार्वजनिक न्यास (पब्लिक ट्रस्ट) से जुड़े एक अहम मामले में स्पष्ट करते हुए कहा है कि ट्रस्ट के विरुद्ध पारित आदेश को कोई भी व्यक्ति व्यक्तिगत हैसियत में चुनौती नहीं दे सकता, भले ही वह ट्रस्ट का अध्यक्ष ही क्यों न हो।

16 RTE के तहत कक्षा-1 में बच्चों को हर हाल में देना होगा प्रवेश

राजस्थान हाईकोर्ट ने स्पष्ट किया है कि निजी स्कूल आरटीई (शिक्षा का अधिकार अधिनियम, 2009) के तहत आवंटित छात्रों को प्रवेश देने से इनकार नहीं कर सकते।

17 Executing Court डिक्री से आगे नहीं जा सकती है

जस्टिस आनंद शर्मा की एकलपीठ ने Anondita Healthcare कंपनी की ओर से दायर याचिकाओं पर फैसला सुनाते हुए स्पष्ट किया कि निष्पादन अदालत (Executing Court) न तो डिक्री से आगे जा सकती है और न ही पुनः ट्रायल कोर्ट जैसा व्यवहार कर सकती है।

18 अर्द्ध-न्यायिक अधिकारी का यह दायित्व है कि वह अदालत के आदेशों का अक्षरशः पालन करे।

जस्टिस अनूप कुमार ढंड की एकलपीठ ने अपने फैसले में कहा है कि कोई भी अधिकारी—चाहे वह प्रशासनिक हो या अर्द्ध-न्यायिक—कानून से ऊपर नहीं है। अदालत के आदेशों का पालन न करना Rule of Law की जड़ों पर प्रहार है और इसे किसी भी स्थिति में स्वीकार नहीं किया जा सकता। हाईकोर्ट ने कहा कि अदालत के आदेशों की अनदेखी न केवल अनुशासनहीनता है, बल्कि यह गंभीर कदाचार (Gross Misconduct) की श्रेणी में आती है, जिस पर संबंधित अधिकारी के विरुद्ध विभागीय कार्रवाई की जा सकती है।

19 SC (CEC) के निर्देशों का पालन औपचारिकता नहीं, बल्कि संवैधानिक और कानूनी बाध्यता

 राजस्थान में नदी से बजरी खनन को लेकर लंबे समय से चल रहे विवाद पर राजस्थान हाईकोर्ट की जयपुर पीठ ने एक अत्यंत महत्वपूर्ण और दूरगामी प्रभाव वाला फैसला सुनाया है।

कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश संजीव प्रकाश शर्मा और जस्टिस बलजिंदर सिंह संधू की खंडपीठ ने स्पष्ट शब्दों में कहा कि सुप्रीम कोर्ट और केंद्रीय अधिकार प्राप्त समिति (CEC) के निर्देशों का पालन कोई औपचारिकता नहीं, बल्कि संवैधानिक और कानूनी बाध्यता है।

20 जहां वैकल्पिक कानूनी उपाय उपलब्ध हों, वहां अवमानना को निष्पादन का औजार नहीं बनाया जा सकता

राजस्थान हाईकोर्ट की जयपुर पीठ ने अवमानना याचिका के मामले में सुप्रीम कोर्ट के स्थापित सिद्धांतों का हवाला देते हुए कहा गया कि जहां वैकल्पिक कानूनी उपाय उपलब्ध हों, वहां अवमानना को निष्पादन का औजार नहीं बनाया जा सकता।

हाईकोर्ट ने सख्त टिप्पणी के साथ याचिका खारिज करते हुए याचिकाकर्ताओं पर ₹1 लाख का जुर्माना लगाया है.

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